गोरखपुर: 2018 बैच के दो सिपाहियों की करतूतों से पुलिस विभाग शर्मसार, दोनों अलग-अलग मामलों में जेल में बंद

गोरखपुर: 2018 बैच के दो सिपाहियों की करतूतों से पुलिस विभाग शर्मसार, दोनों अलग-अलग मामलों में जेल में बंद
गोरखपुर में तैनात वर्ष 2018 बैच के दो सिपाहियों की गंभीर आपराधिक गतिविधियों ने पुलिस विभाग की छवि पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। संयोग से दोनों सिपाही गाजीपुर जनपद के रहने वाले बताए जा रहे हैं और दोनों ही अलग-अलग मामलों में जेल की सलाखों के पीछे हैं। इन घटनाओं ने न केवल पुलिस महकमे बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है।
पहला मामला सिपाही अभिषेक यादव से जुड़ा है, जिस पर जिला अस्पताल से 10 वर्षीय बच्ची का अपहरण करने का आरोप है। आरोप है कि बच्ची को अगवा करने के बाद उसके साथ दुष्कर्म किया गया और फिर उसकी हत्या कर शव नदी में फेंक दिया गया। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया। पुलिस ने जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और अन्य सबूतों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया। वर्तमान में वह न्यायिक हिरासत में है और उसके खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म, हत्या सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है।
दूसरा मामला सिपाही शशिकांत यादव का है, जिस पर फर्जी दस्तावेजों और फर्जी पते के आधार पर पासपोर्ट बनवाने के बड़े रैकेट में शामिल होने का आरोप है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि उसने पंजाब और दिल्ली के तीन कुख्यात गैंगस्टरों सहित कुल 22 लोगों के पासपोर्ट फर्जी सत्यापन के आधार पर बनवाने में कथित भूमिका निभाई। जांच में कई दस्तावेजों और सत्यापन प्रक्रिया में अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
इन दोनों मामलों ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और सत्यापन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने दोनों मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी है। साथ ही यह जांच की जा रही है कि क्या इन मामलों में अन्य पुलिसकर्मी या बाहरी लोग भी शामिल थे।
फिलहाल दोनों आरोपी सिपाही जेल में बंद हैं और पुलिस उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ा रही है। वहीं विभाग का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी ताकि पुलिस की साख बनाए रखी जा सके और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।



