आर्य समाज मंदिर ने मुआवजे में धांधली का लगाया आरोप, निष्पक्ष जांच और मुआवजे की मांग

आर्य समाज मंदिर ने मुआवजे में धांधली का लगाया आरोप, निष्पक्ष जांच और मुआवजे की मांग

गोरखपुर: आर्य समाज गोरखपुर ने विरासत गलियारा (हेरिटेज कॉरिडोर) निर्माण प्रक्रिया और इसके मुआवजे वितरण पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संस्था ने आरोप लगाया है कि विरासत गलियारा क्षेत्र में स्थित एक विवादित संपत्ति का मुआवजा गलत तरीके से एक गैर-संबंधित (असंबद्ध) व्यक्ति को दे दिया गया है।
क्या है मुख्य मामला?
आर्य समाज मंदिर प्रशासन का कहना है कि विरासत गलियारा क्षेत्र में स्थित संस्था “आर्य शिक्षा सभा” की एक संपत्ति पूर्व से ही विवादित रही है। इस संपत्ति से जुड़ा मामला उप जिलाधिकारी सदर (SDM) जनपद गोरखपुर के न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद, विवाद जारी रहने के दौरान ही प्रशासन द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को इसके मुआवजे का भुगतान कर दिया गया।
कानूनी आदेश के बिना निर्माण कार्य रोकने का विरोध
संस्था ने स्पष्ट किया है कि वह कानून का पूर्ण सम्मान करती है। हालांकि, उनका कहना है कि यदि प्रशासन या किसी अन्य पक्ष को किसी प्रकार की वैधानिक आपत्ति है, तो सक्षम न्यायालय का लिखित आदेश उपलब्ध कराया जाना चाहिए। केवल मौखिक निर्देशों के आधार पर संस्था द्वारा किए जा रहे पुनर्निश्र्माण और यज्ञशाला के निर्माण कार्य को रोकना अनुचित है।
आर्य समाज की प्रमुख मांगें:
निष्पक्ष जांच: पूरे प्रकरण की पारदर्शी एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
मुआवजे का भुगतान: आर्य समाज मंदिर के ध्वस्तीकरण के क्रम में देय मुआवजा एवं ध्वस्तीकरण शुल्क तत्काल जारी किया जाए।
निर्माण कार्य में बाधा न डालें: यज्ञशाला के पुनर्निर्माण कार्य में गैर-कानूनी और अनावश्यक व्यवधान उत्पन्न न किया जाए।
कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
आर्य समाज के न्यासी एवं विधि प्रकोष्ठ के संयोजक निशांत रंजन (एडवोकेट) ने कहा कि यदि इस मामले में जल्द न्यायोचित कार्रवाई नहीं की जाती है, तो संस्था अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सक्षम न्यायालय और विधिक मंचों का सहारा लेने के लिए बाध्य होगी।



