शिक्षकों को TET से मुक्त करने की मांग

शिक्षकों को TET से मुक्त करने की मांग
सांसद आर.के. चौधरी एवं राजनाथ सिंह के प्रतिनिधि को सौंपा ज्ञापन
लखनऊ, 8 अगस्त 2026। 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किए जाने तथा उनके सेवा संबंधी अधिकारों की सुरक्षा की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी एसोसिएशन ने आज दिनांक 8 अगस्त 2026 को महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन लखनऊ के सांसद माननीय आर.के. चौधरी को एवं माननीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी के प्रतिनिधि को सौंपा गया। इस दौरान उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष हरिशरण मिश्रा, प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार दीक्षित तथा उपाध्यक्षगण देवेश शुक्ला, के.के. मिश्रा एवं सुनील कपूर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
ज्ञापन में कहा गया कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त लाखों शिक्षक उस समय लागू नियमों एवं निर्धारित शैक्षिक योग्यताओं के आधार पर विधिवत नियुक्त हुए थे और अनेक शिक्षक पिछले 15, 20 तथा 30 वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे शिक्षकों पर बाद में निर्धारित TET की अनिवार्यता लागू होने से उनकी सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति, वेतन, पेंशन एवं भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति उत्पन्न हुई है।
एसोसिएशन ने सरकार से मांग की कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त करने के लिए स्पष्ट आदेश जारी किया जाए तथा उनके सभी वैधानिक सेवा अधिकारों की निरंतरता सुनिश्चित की जाए।
संगठन ने यह भी मांग की कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम अथवा अन्य उपयुक्त कानून में आवश्यक संशोधन कर पूर्व नियुक्त शिक्षकों को स्पष्ट विधिक संरक्षण प्रदान किया जाए, ताकि बाद में निर्धारित पात्रता मानकों का प्रतिकूल प्रभाव उन शिक्षकों पर न पड़े, जिन्होंने अपनी नियुक्ति के समय लागू सभी नियमों एवं योग्यताओं को पूरा किया था।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि यह मामला केवल शिक्षकों की नौकरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे लाखों शिक्षक परिवारों, विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के भविष्य का प्रश्न जुड़ा हुआ है। वर्षों से शिक्षा व्यवस्था में योगदान दे रहे शिक्षकों को अनिश्चितता में रखना उचित नहीं है।
प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार से संवेदनशील, न्यायपूर्ण एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।



