वंदे मातरम’ को मिला जन गण मन’ जैसा कानूनी दर्जा: राष्ट्रपति मुर्मू की मंजूरी, अनादर पर होगी जेल

वंदे मातरम’ को मिला जन गण मन’ जैसा कानूनी दर्जा: राष्ट्रपति मुर्मू की मंजूरी, अनादर पर होगी जेल
नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के गायन में जानबूझकर बाधा डालना या इसे रोकना एक दंडनीय अपराध होगा।
इस संशोधन के साथ ही राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को भी ‘जन गण मन’ (राष्ट्रगान) के समान कानूनी सुरक्षा और दर्जा दे दिया गया है।
विधेयक से जुड़े मुख्य बिंदु
संसदीय प्रक्रिया: यह विधेयक 30 जुलाई को लोकसभा में पारित हुआ था, जबकि राज्यसभा ने इसे एक दिन पहले ही मंजूरी दे दी थी।
सजा का प्रावधान: * ‘वंदे मातरम’ के गायन में व्यवधान डालने या अनादर करने पर अधिकतम 3 साल की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
दोबारा या बार-बार यह अपराध करने पर कम से कम 1 साल की अनिवार्य कैद का प्रावधान है।
ऐतिहासिक आधार: विधेयक में 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद के उस वक्तव्य का उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान के समान दर्जा और सम्मान देने की बात कही थी।
गृह मंत्रालय के प्रमुख दिशा-निर्देश
लाल किले पर गायन: स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहली बार लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम’ का आधिकारिक गायन किया जाएगा।
गायन का क्रम: यदि राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत एक साथ बजाए जाते हैं, तो ‘वंदे मातरम’ के सभी छह श्लोक पहले गाए जाएंगे।
समय सीमा व प्रोटोकॉल: ‘वंदे मातरम’ के छह छंदों की कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड तय की गई है। इसका गायन राष्ट्रपति के आगमन, ध्वजारोहण और राज्यपालों के भाषण जैसे आधिकारिक राष्ट्रीय समारोहों में किया जाएगा।



