गोरखपुर : भूमि विवाद में उत्पीड़न का आरोप, प्रशासन से न्याय की गुहार

भूमि विवाद में उत्पीड़न का आरोप, प्रशासन से न्याय की गुहार
गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में रामनाथ निषाद की प्रेस वार्ता
गोरखपुर। गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में रामनाथ निषाद ने अपनी पैतृक जमीन को लेकर चल रहे विवाद और कथित उत्पीड़न का मामला मीडिया के सामने रखा। उन्होंने बताया कि उनका मामला ग्राम समाज की भूमि से जुड़ा है, जो आराजी संख्या 346 व 347, ग्राम झारखण्डी (जक्खनपुर) से संबंधित है। इस भूमि को लेकर वर्ष 2014 से न्यायालय में वाद विचाराधीन है और उपजिलाधिकारी न्यायालय में धारा 229-बी के तहत मुकदमा चल रहा है।
उन्होंने बताया कि न्यायालय द्वारा 07 अप्रैल 2025 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश पारित किया गया था, जिसे बाद में भी कायम रखा गया। इसके बावजूद विपक्षी पक्ष द्वारा लगातार आदेश की अवहेलना करते हुए जमीन पर कब्जा करने और रास्ता निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
रामनाथ निषाद ने आरोप लगाया कि 23 जुलाई 2026 को विपक्षियों ने जबरन जमीन पर निर्माण कार्य शुरू करने की कोशिश की। विरोध करने पर उनके साथ अभद्रता की गई और जान से मारने की धमकी दी गई। उन्होंने कहा कि विपक्षी पक्ष के कुछ लोग ट्रैक्टर से मिट्टी डालकर रास्ता बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि मामला न्यायालय में लंबित है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे प्रकरण में उन्हें और उनके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। कई बार स्थानीय प्रशासन और उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी पक्ष प्रभावशाली होने के कारण अधिकारियों को गलत जानकारी देकर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है।
प्रेस वार्ता के दौरान रामनाथ निषाद ने राजनीतिक साजिश की भी आशंका जताई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में उन्होंने एक भाजपा प्रत्याशी का समर्थन किया था, जिसके बाद से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उनकी पत्नी वार्ड नंबर 18 से पार्षद हैं, और परिवार को लगातार परेशान किया जा रहा है।
उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने, न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित कराने और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने की मांग की।



