गोरखपुर : प्रधानमंत्री आवास योजना में अनियमितताओं का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

प्रधानमंत्री आवास योजना में अनियमितताओं का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
सुशील कुमार शुक्ला ने प्रेस वार्ता में उठाए कई गंभीर मुद्दे, कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
गोरखपुर। गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में अधिवक्ता सुशील कुमार शुक्ला ने प्रधानमंत्री आवास योजना समेत विभिन्न सरकारी योजनाओं में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि 23 जुलाई 2026 को माननीय न्यायालय द्वारा वार्ड-43 के निर्वाचन को शून्य घोषित किए जाने के बाद भी संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमों के अनुरूप कार्रवाई नहीं की जा रही है, जो न्यायालय के आदेश की अवहेलना है।
सुशील कुमार शुक्ला ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत लाभार्थियों के चयन और आवास वितरण की प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि पात्रता के मानकों की अनदेखी कर अपात्र लोगों को लाभ दिया गया, जबकि वास्तविक जरूरतमंद इससे वंचित रह गए। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
प्रेस वार्ता में उन्होंने ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि पूर्व पदाधिकारी के कार्यकाल में उनके परिवार से जुड़े लोगों को योजना का लाभ दिया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है कि लाभार्थियों का चयन निर्धारित नियमों के अनुसार हुआ या नहीं।
उन्होंने आगे कहा कि लाभार्थियों की पात्रता, निवास और योजना की शर्तों का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि योजना का लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंचा या नहीं। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी व्यक्ति या अधिकारी द्वारा गलत जानकारी देकर या नियमों के विपरीत लाभ दिलाने की पुष्टि होती है, तो उनके खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सुशील कुमार शुक्ला ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व कार्यकाल में नगर निगम, डूडा (DUDA) और अन्य संबंधित विभागों द्वारा कराए गए विकास कार्यों में भी अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि कार्यों की गुणवत्ता, निविदा प्रक्रिया और भुगतान की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि कहीं गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने मांग की कि पूरी जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, ताकि आम जनता का सरकारी योजनाओं पर विश्वास बना रहे। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी मांग किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए है।



