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गाजीपुर : अभियोजन कार्यों की समीक्षा में डीएम सख्त, अधिक से अधिक दोषसिद्धि सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

अभियोजन कार्यों की समीक्षा में डीएम सख्त, अधिक से अधिक दोषसिद्धि सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

जून माह में 64 वादों का निस्तारण, हत्या, दहेज हत्या व पॉक्सो मामलों में कई अभियुक्तों को मिली सजा

गाजीपुर, 27 जुलाई। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में अभियोजन कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जून 2026 के दौरान न्यायालयों में निस्तारित मामलों, दोषसिद्धि की स्थिति, सम्मन-वारंटों की तामील, गवाहों की उपस्थिति तथा जमानत प्रार्थना पत्रों की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने अभियोजन अधिकारियों को प्रभावी पैरवी कर अधिक से अधिक मामलों में दोषसिद्धि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।समीक्षा के दौरान बताया गया कि जून 2026 में भारतीय दंड संहिता के तहत 58 वादों का निस्तारण हुआ, जिनमें 11 मामलों में अभियुक्तों को सजा, एक मामले में रिहाई, 12 मामलों का सुलह के आधार पर तथा 34 मामलों का कमिट के आधार पर निस्तारण हुआ। वहीं अन्य अधिनियमों के तहत 6 मामलों का निस्तारण हुआ, जिनमें दो मामलों में सजा और चार मामलों में अभियुक्तों को रिहा किया गया।बैठक में बताया गया कि दहेज हत्या, हत्या एवं पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में न्यायालय द्वारा कई अभियुक्तों को 10 वर्ष के कारावास तथा एक हत्या के मामले में मृत्युदंड तक की सजा सुनाई गई। इन मामलों में जिला शासकीय अधिवक्ताओं एवं लोक अभियोजकों द्वारा प्रभावी पैरवी की गई, जिसकी जिलाधिकारी ने सराहना की।समीक्षा में यह भी बताया गया कि माह जून के दौरान कुल 331 सम्मन एवं वारंट जारी किए गए, जिनमें से 238 की तामील कराई गई। तामील के उपरांत 185 गवाह न्यायालय में उपस्थित हुए, जिनमें से 172 गवाहों का परीक्षण कराया गया। शेष गवाह अधिवक्ताओं की हड़ताल एवं संबंधित अधिकारियों के अवकाश के कारण परीक्षित नहीं हो सके।सत्र न्यायालयों में भी सम्मन एवं वारंट की तामील की समीक्षा करते हुए बताया गया कि 328 सम्मनों के सापेक्ष 281 की तामील हुई। इसके परिणामस्वरूप 252 गवाह उपस्थित हुए, जिनमें से 232 गवाहों का परीक्षण कराया गया।बैठक में जमानत प्रार्थना पत्रों की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जून माह में अधीनस्थ न्यायालयों में 145 जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल हुए, जिनमें 79 स्वीकृत तथा 66 अस्वीकृत किए गए।बैठक के दौरान अपर जिलाधिकारी (भू-राजस्व) ने जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) एवं लोक अभियोजकों को निर्देशित किया कि जिन मामलों में अभियुक्त बरी हुए हैं, उनकी पुनः विधिवत समीक्षा कर आवश्यक होने पर अपील का प्रस्ताव तैयार किया जाए। साथ ही जिन मामलों में गवाह पक्षद्रोही हो रहे हैं, उनमें नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।जिलाधिकारी ने सभी अभियोजकों को निर्देश दिया कि प्रत्येक माह कम से कम एक वाद की केस डायरी तैयार कर विवेचना में हुई त्रुटियों का विश्लेषण करें, ताकि भविष्य में कमियों को दूर कर अभियोजन को और प्रभावी बनाया जा सके तथा अधिक से अधिक मामलों में दोषसिद्धि सुनिश्चित हो।

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