गाजीपुर : उर्वरक की कालाबाजारी पर प्रशासन का शिकंजा, दो विक्रेताओं पर एफआईआर

उर्वरक की कालाबाजारी पर प्रशासन का शिकंजा, दो विक्रेताओं पर एफआईआर
पीओएस मशीन के स्टॉक और भौतिक स्टॉक में मिला अंतर, डीएम के निर्देश पर हुई कार्रवाई; कृषि विभाग ने कहा—जनपद में उर्वरक की कमी नहीं

गाजीपुर, 10 अगस्त। जिले में उर्वरक की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। जिलाधिकारी गाजीपुर के निर्देश पर उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों की जांच और निगरानी की जा रही है। इसी क्रम में कासिमाबाद तहसील क्षेत्र में दो उर्वरक विक्रेताओं के यहां जांच के दौरान पीओएस मशीन में प्रदर्शित स्टॉक और मौके पर उपलब्ध भौतिक स्टॉक में अंतर पाए जाने पर दोनों के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराई गई है।जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि उप जिलाधिकारी कासिमाबाद द्वारा मेसर्स कुशवाहा ब्रदर्स, बरेसर, विकासखंड कासिमाबाद तथा मेसर्स अजय कुशवाहा खाद भंडार, बरेसर, विकासखंड कासिमाबाद का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक और भौतिक रूप से उपलब्ध उर्वरक के स्टॉक में अंतर पाया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी के निर्देश के क्रम में दोनों उर्वरक विक्रेताओं के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करा दी गई है।जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि जिले में उर्वरक की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है। जिलाधिकारी के निर्देश पर कृषि विभाग की टीमों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर उर्वरक विक्रेताओं के स्टॉक की निगरानी की जा रही है। अनियमितता मिलने पर संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने स्पष्ट किया कि जनपद में उर्वरक की कोई कमी नहीं है। ऐसे में किसानों को किसी प्रकार की घबराहट में उर्वरक का अनावश्यक भंडारण करने की आवश्यकता नहीं है।कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे उर्वरकों का क्रय एवं प्रयोग वैज्ञानिक संस्तुतियों के अनुसार ही करें। किसी भी दशा में आवश्यकता से अधिक उर्वरक न खरीदें और न ही उसका प्रयोग करें। आवश्यकता से अधिक उर्वरक के इस्तेमाल से खेती की लागत बढ़ने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।जिला कृषि अधिकारी ने किसानों को संतुलित एवं गुणवत्तापूर्ण खेती के लिए हरी खाद, कम्पोस्ट खाद, वर्मी कम्पोस्ट, नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया जैसे विकल्पों के प्रयोग को बढ़ावा देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाकर किसान खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ मृदा स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रख सकते हैं।कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि उर्वरक वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक और वास्तविक स्टॉक में अंतर अथवा अन्य किसी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस कार्रवाई से उर्वरक विक्रेताओं में भी हड़कंप की स्थिति है।



