गाजीपुर : 17 लाख बच्चों-किशोरों को खिलाई जाएगी कृमि मुक्ति की दवा

17 लाख बच्चों-किशोरों को खिलाई जाएगी कृमि मुक्ति की दवा
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर माउंट लिटेरा जी स्कूल में अभियान का शुभारंभ, एसीएमओ ने अभिभावकों से बच्चों को दवा खिलाने की अपील की
गाजीपुर, 10 अगस्त। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर सोमवार को प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एसीएमओ) डॉ. एम.के. सिंह ने माउंट लिटेरा जी स्कूल में बच्चों को कृमि मुक्ति की दवा एल्बेंडाजोल खिलाकर अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को कृमि संक्रमण से बचाव के प्रति जागरूक करते हुए अभिभावकों से निर्धारित अभियान के तहत अपने बच्चों को दवा अवश्य खिलाने की अपील की।एसीएमओ ने बताया कि जिले में करीब 17 लाख बच्चों एवं किशोरों को पेट के कीड़ों से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य केंद्रों, पंजीकृत विद्यालयों के साथ ही ईंट-भट्ठों पर कार्य करने वाले श्रमिकों और घुमंतू समुदाय के बच्चों को भी कृमि मुक्ति की दवा खिलाई जा रही है।उन्होंने बताया कि किसी कारणवश जो बच्चे राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर दवा नहीं खा पाए हैं, उन्हें 14 अगस्त को मॉपअप राउंड के दौरान दवा खिलाई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एल्बेंडाजोल की दवा खाली पेट नहीं खिलानी चाहिए। एक से दो वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली तथा दो से 19 वर्ष तक के बच्चों एवं किशोरों को पूरी गोली दी जानी है। छोटे बच्चों को गोली पीसकर तथा बड़े बच्चों को गोली चबाकर खिलाई जा सकती है।कृमि संक्रमण से शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित,डॉ. एम.के. सिंह ने बताया कि कृमि मुक्ति की दवा बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बच्चे अक्सर जमीन से कोई वस्तु उठाकर मुंह में डाल लेते हैं अथवा नंगे पैर घूमते हैं, जिससे उनके शरीर में कृमि संक्रमण होने की आशंका रहती है। पेट में मौजूद कृमि बच्चे के भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों का उपयोग कर लेते हैं। इससे बच्चों में कमजोरी, कुपोषण और खून की कमी (एनीमिया) जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं तथा उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।उन्होंने बताया कि कृमि के चक्र को तोड़ने के लिए समय-समय पर बच्चों को कृमि मुक्ति की दवा खिलाना जरूरी है। एल्बेंडाजोल बच्चों को आसानी से खिलाने के लिए स्वादिष्ट बनाने का प्रयास किया जाता है, जिससे बच्चे इसे सहजता से ले सकें।दवा खाने के बाद हल्के प्रतिकूल प्रभाव से न घबराएं,एसीएमओ ने बताया कि जिन बच्चों के पेट में पहले से कृमि मौजूद होते हैं, उन्हें दवा खाने के बाद कभी-कभी हल्के प्रतिकूल प्रभाव महसूस हो सकते हैं। इनमें हल्का चक्कर, घबराहट, सिरदर्द, दस्त, पेट दर्द, कमजोरी, मितली, उल्टी अथवा भूख लगना शामिल हो सकता है। उन्होंने कहा कि इन लक्षणों से घबराने की जरूरत नहीं है। सामान्यतः ये प्रभाव दो से चार घंटे में स्वतः समाप्त हो जाते हैं। आवश्यकता पड़ने पर आशा या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मदद से चिकित्सक से संपर्क किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि कृमि मुक्ति की दवा बच्चों को कुपोषण, एनीमिया तथा कृमि संक्रमण से होने वाली अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने सभी अभिभावकों से अभियान को सफल बनाने के लिए अपने बच्चों को निर्धारित तिथि पर दवा जरूर खिलवाने की अपील की।कार्यक्रम में जिला मलेरिया अधिकारी मनोज कुमार, जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रभु नाथ, जिला सामुदायिक प्रबंधक अनिल वर्मा, अर्बन हेल्थ कोऑर्डिनेटर अशोक कुमार एवं एविडेन्स एक्शन के संतोष कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेश के. ने की।



