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गोरखपुर में सेंट एंड्रयूज कॉलेज के छात्र 8 अगस्त को करेंगे महाआंदोलन

गोरखपुर में सेंट एंड्रयूज कॉलेज के छात्र 8 अगस्त को करेंगे महाआंदोलन

प्रेस विज्ञप्ति जारी कर छात्र संयुक्त संघर्ष समिति ने किया ऐलान

आरोप : पद सम्भालते ही प्राचार्य ने किया 18 शिक्षको का निष्कासन

शैक्षणिक संकट,शिक्षकों के निष्कासन, बी.एड. धांधली, 18 वर्ष पुराने स्किल सेंटर की तालाबांदी व मौखिकी बंदिश का मामला

गोरखपुर । सेंट एंड्रयूज कॉलेज में नई प्राचार्या के पदभार संभालते ही उत्पन्न शैक्षणिक संकट, निष्कासित शिक्षकों की सूची, बी.एड. धांधली, 18 वर्ष पुराने स्किल सेंटर की तालाबांदी व मौखिकी बंदिश को लेकर महाविद्यालय की छात्र संयुक्त संघर्ष समिति ने 8 अगस्त को महा-आंदोलन की घोषणा प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से किया है।
जारी प्रेस विज्ञप्ति में छात्रों ने लिखा है कि पूर्वांचल के ऐतिहासिक एवं प्रतिष्ठित सेंट एंड्रयूज कॉलेज (पीजी), गोरखपुर में वर्तमान में व्याप्त गंभीर शैक्षणिक संकट एवं कॉलेज प्रशासन की तानाशाही के विषय में निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से जन-जन एवं शासन तक सत्य पहुँचाने हेतु यह विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा रही है।

*1. क्या है पूरा मामला*

कॉलेज में वर्तमान शैक्षणिक संकट की शुरुआत तब हुई जब प्रो. रैना निवेदिता सैमुअल ने प्राचार्या पद का कार्यभार संभाला। पदभार ग्रहण करते ही बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया, पूर्व नोटिस या संवैधानिक आधार के वर्षों से समर्पित सेवाएं दे रहे अत्यंत योग्य एवं विद्वान शिक्षकों पर निष्कासन की गाज गिरानी शुरू कर दी गई।

20 जुलाई 2026 को सबसे पहले दर्शनशास्त्र विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. विकास कुमार सरकार को बिना किसी ठोस कारण के असंवैधानिक रूप से सेवा समाप्ति का नोटिस थमा दिया गया।

1 अगस्त 2026 को कॉलेज प्रशासन द्वारा चुपचाप उपस्थिति रजिस्टर से विभिन्न विभागों व केंद्रों के 16 से अधिक वरिष्ठ एवं योग्य शिक्षकों के नाम हटा दिए और उन्हें अध्यापन कार्य से रोक दिया गया।
3 अगस्त 2026 को इस तानाशाही रवैये के विरोध में विभिन्न विभागों के दर्जनों छात्र-छात्राओं ने प्राचार्या को लिखित आवेदन सौंपकर योग्य शिक्षकों को बहाल करने की मांग की, परंतु प्रशासन ने कोई सकारात्मक आश्वासन नहीं दिया।
जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि कॉलेज के हज़ारों विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लग गया है। निष्कासित शिक्षकों के मार्गदर्शन के कारण विगत सेमेस्टर में छात्रों ने उत्कृष्ट अंक प्राप्त किए थे। अब आगामी परीक्षाएं वर्णनात्मक प्रणाली के तहत आयोजित होनी हैं, जिसमें गहन विषय-ज्ञान और अनुभवी अध्यापकों की अत्यंत आवश्यकता है। इसके विपरीत, हटाए गए शिक्षकों के स्थान पर लाए गए नवनियुक्त शिक्षक अनुभवहीन हैं और छात्र उनके पठन-पाठन से पूरी तरह असंतुष्ट हैं।

*इन शिक्षकों का हुआ निष्कासन*

दर्शनशास्त्र से डॉ. विकास कुमार सरकार

इनफार्मेशन एंड टेक्नोलॉजी (IT) से सुश्री प्रिया राय

क्रिएटिव आर्ट एंड इनोवेटिव सेंटर से श्रीमती इमराना खान, श्रीमती पूर्णिमा अग्रवाल

बॉटनी से डॉ. दिलीप त्रिपाठी, डॉ. प्रीति प्रकाश, डॉ. शशांक सिंह, डॉ. वैभव शरण पाण्डेय

उर्दू के डॉ. अशफाक अहमद

हिन्दी के डॉ. अभिनव सिंह

भूगोल के डॉ. आलोक कुशवाहा, डॉ. गोपाल मौर्या

अर्थशास्त्र से डॉ. सौम्या मोदी

राजनीति शास्त्र के डॉ. विमलेश यादव

गणित के डॉ. विनोद चौधरी

विधि (कानून) के डॉ. कुमार गौरव श्रीवास्तव, डॉ. परवेज आलम

समाजशास्त्र के डॉ. संजीव श्रीवास्तव

*बी.एड. विभाग में अवैध अध्यापन एवं नियम-विरुद्ध बहाली*

छात्रों का आरोप है कि शैक्षणिक अनैतिकता का एक और बड़ा मामला बी.एड. विभाग का है। यहाँ सेवारत एक शिक्षिका स्वयं इसी कॉलेज में विधि (LL.B.) की नियमित छात्रा हैं। मई-जून 2026 की एलएल. बी. परीक्षा के दौरान उन्हें अनुचित साधनों के प्रयोग में पकड़ा गया था, जिस पर अनुशासन समिति ने उन्हें निष्कासित कर दिया था। इसके अतिरिक्त उनके पास बी.एड. में पढ़ाने की न्यूनतम योग्यता भी नहीं है। इसके बावजूद वर्तमान प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर उन्हें पुनः बी.एड. विभाग में अध्यापन हेतु बुला लिया है।

*18 वर्ष पुराने ‘कौशल विकास केंद्र’ पर मौखिक तानाशाहीः फीस वापसी नहीं, विभाग संचालन ही वास्तविक न्याय*

आरोप है कि महाविद्यालय में विद्यार्थियों के व्यावहारिक एवं स्वरोजगार-उन्मुख कौशल विकास हेतु विगत 18 वर्षों से सफलतापूर्वक संचालित ‘क्रिएटिव आर्ट एंड इनोवेटिव सेंटर’ (पूर्व नामः सेंटर ऑफ फैशन डिजाइनिंग) को प्राचार्या महोदया द्वारा बिना किसी लिखित आदेश के केवल मौखिक निर्देश देकर अचानक बंद कर दिया गया है।
यह केंद्र विगत दो दशकों से छात्र-छात्राओं को स्वावलंबी बनाने और उनके हुनर को तराशने में ऐतिहासिक भूमिका निभा रहा था। चालू शैक्षणिक सत्र में भी इसमें दर्जनों छात्र-छात्राओं ने विधिवत प्रवेश लिया था और कॉलेज प्रशासन द्वारा उनसे नामांकन शुल्क (Fees) भी जमा कराया गया था। परंतु अब प्राचार्या महोदया द्वारा कोई लिखित सूचना या कारण प्रस्तुत किए बिना, केवल मौखिक रूप से विभाग को बंद करने का निर्णय सुना दिया गया है और इसमें कार्यरत निष्ठावान शिक्षिकाओं को हटा दिया गया है।
वही विरोध दर्ज कराने पर कॉलेज प्रशासन द्वारा 16 अगस्त तक फीस वापस करने का मौखिक आश्वासन दिया जा रहा है। परंतु छात्र संयुक्त संघर्ष समिति यह स्पष्ट करती है कि केवल फीस लौटा देना छात्रों के साथ न्याय नहीं है। छात्र महाविद्यालय में ज्ञान, कौशल और अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करने आते हैं, न कि अपनी ही जमा फीस वापस लेने। 18 वर्षों से चल रहे विभाग को इस तरह मौखिक फरमान से बंद करना छात्रों के भविष्य के साथ सरासर छल और उनके कौशल विकास के मार्ग में बहुत बड़ी बाधा है। हमारी स्पष्ट मांग है कि इस विभाग को अविलंब पुनः संचालित किया जाए।

*अल्टीमेटम एवं 8 अगस्त को महा-आंदोलन का निर्णय*

जारी विज्ञप्ति में महाविद्यालय के समस्त विभागों के छात्रों ने मीडिया के माध्यम से प्रशासन के समक्ष अपनी अंतिम चेतावनी रखी है:

1. कॉलेज प्रशासन को 7 अगस्त 2026 तक निष्कासित शिक्षकों को बहाल करने तथा बंद ‘क्रिएटिव आर्ट एंड इनोवेटिव सेंटर’ को पुनः सुचारू रूप से चालू करने का समय दिया जा रहा है।

2. 7 अगस्त 2026 को प्राचार्या महोदया को पुनः अंतिम ज्ञापन/स्मरण-पत्र सौंपा जाएगा।

3. यदि इसके बावजूद छात्र-हितों की अनदेखी की गई, तो 8 अगस्त 2026 को अपने हक की लड़ाई के लिए विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं द्वारा परिसर में एक विशाल उग्र आंदोलन का रूप दिया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन की होगी।

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