Breaking Newsभारत

गोरखपुर का ‘महा-विवाद’: अब दिल्ली दरबार से खबरें रुकवाने की सनसनीखेज कोशिश!

गोरखपुर का ‘महा-विवाद’: अब दिल्ली दरबार से खबरें रुकवाने की सनसनीखेज कोशिश!

आइओ से लेकर जज तक सब मैनेज हैं…” के दावों के बाद अब सीधे मंत्रालय में शिकायत!
​‘सिंह दंपत्ति’ पर मीडिया को डराने और रात 10 बजे के बाद खबरें डिलीट करवाने के गंभीर आरोप
​गोरखपुर। एफ-बार बाय फैशन टीवी (F-Bar by Fashion TV) विवाद में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। गोरखपुर में रसूखदारों के कथित “सेटिंग” के सारे पैंतरे जब फेल हो गए, तो अब इस मामले के तार देश की राजधानी दिल्ली से जुड़ते दिख रहे हैं। ताजा आरोपों के मुताबिक, विवादों में घिरे ‘सिंह दंपत्ति’ ने अब दिल्ली के गलियारों का इस्तेमाल कर मीडिया की आवाज दबाने और खबरें रुकवाने की आखरी कोशिश शुरू कर दी है।

स्थानीय ‘सिस्टम’ फेल, तो दिल्ली का रुख?
​मामले को उजागर करने वाले पत्रकार और मीडिया संस्थान का दावा है कि आरोपियों ने पहले स्थानीय स्तर पर आईओ (विवेचक), एसपी सिटी, एसएसपी, डीआईजी से लेकर सत्तापक्ष के विधायक, सांसद और यहां तक कि मुख्यमंत्री कार्यालय तक अपनी कथित “नजदीकियों” का धौंस जमाने की कोशिश की।
​जब जमीनी स्तर पर यह ‘रसूख’ बेअसर साबित हुआ, तो अब केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting) में झूठी शिकायतें भेजकर खबरें जबरन हटवाने का नया पैंतरा चला गया है।
​रात 10 बजे के बाद आया ‘रहस्यमयी’ फोन!
मीडिया संस्थान का आरोप है कि “सिंह” साहिबा की तरफ से देर रात एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। फोन पर सीधा दबाव बनाया गया कि “रात 10 बजे के बाद चैनल से इस मामले की सभी खबरें डिलीट कर दी जाएं।” इतना ही नहीं, मीडिया से एक ऐसा ‘नो कवरेज NOC’ (अनापत्ति प्रमाण पत्र) भी मांगा गया, जिसमें यह लिखा हो कि भविष्य में यह चैनल इस दंपत्ति के खिलाफ कभी कोई खबर नहीं चलाएगा।

​2025 की शुरुआत: गोरखपुर के रामगढ़ताल थाने में एफ-बार बाय फैशन टीवी की कानपुर फ्रेंचाइजी को लेकर धोखाधड़ी और फर्जी हस्ताक्षर का मुकदमा दर्ज होता है। इसके बाद गोरखपुर के वैभव मणि त्रिपाठी की गिरफ्तारी होती है।

​मुंबई कनेक्शन: पुलिस जांच के तार मुंबई स्थित ‘फैशन टीवी इंडिया’ के मैनेजिंग डायरेक्टर काशिफ खान तक पहुंचते हैं। पुलिस टीम मुंबई के ऑफिस पर छापा मारकर काशिफ खान, नवीन आहूजा और कृष्ण शाह को गिरफ्तार कर लेती है।

करोड़ों की ‘डीलिंग’ का आरोप: इस हाई-प्रोफाइल केस में ट्विस्ट तब आया जब ‘सिंह दंपत्ति’ पर अदालत के बाहर मामले को रफा-दफा करने के लिए करोड़ों रुपये वसूलने (Extortion) के आरोप लगे। दावा है कि शुरुआत में 6 से 7 करोड़ रुपये की मांग की गई, जो बाद में घटकर 1.5 करोड़ और अंत में 1 करोड़ 10 लाख रुपये पर आकर रुकी।

कथित ‘स्टिंग’ में सिस्टम को ठेंगे पर रखने का दावा
​इस पूरे खेल से जुड़ा एक कथित “स्टिंग” भी चर्चाओं में है। दावा किया जा रहा है कि इस ऑडियो/वीडियो क्लिप में केस के विवेचक विवेचक और यहां तक कि माननीय जज तक को “मैनेज” करने की खुली बातें कही जा रही हैं। क्लिप में पुलिस के आला अधिकारियों (वर्तमान व पूर्व एसपी सिटी) के लिए बेहद आपत्तिजनक और अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही, जेल में मुलाकात के संदर्भ में गोरखपुर के सांसद के नाम का भी दुरुपयोग करने का दावा है।

मीडिया का दोटूक जवाब: “हम किसी को ब्लैकमेल नहीं कर रहे, साक्ष्य मजबूत हैं”

चौतरफा दबाव और धमकियों के बीच मीडिया संस्थान ने झुकने से साफ इनकार कर दिया है। संस्थान के मुख्य पत्रकार ने साफ कहा:​”कोई भी जिम्मेदार मीडिया संस्थान किसी व्यक्ति या कंपनी को ऐसा ‘क्लीन चिट’ देने वाला एनओसी जारी नहीं करता, जो भविष्य में पत्रकारिता के अधिकार को ही खत्म कर दे। हमारे पास इस पूरे मामले के पुख्ता और अकाट्य साक्ष्य (Evidences) मौजूद हैं, जिनकी कुछ क्लिप्स हमने सक्षम अधिकारियों को भी सौंप दी हैं।”

पत्रकार ने विरोधियों के उन दावों को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें इसे AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा जनरेटेड फर्जी ऑडियो बताया जा रहा था। पत्रकार ने स्पष्ट किया कि खबर को विजुअल रूप देने के लिए केवल कुछ प्रतीकात्मक (Symbolic) तस्वीरें AI से बनाई गई थीं, लेकिन जो मुख्य ऑडियो और दस्तावेजी आरोप हैं, वे 100% असली और प्रमाणित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सिंह दंपत्ति का कोई पक्ष है, तो चैनल उसे भी प्रमुखता से दिखाने को तैयार है।
​सबसे बड़े सुलगते सवाल?

क्या वाकई ‘सच्चाई’ को दफन करने के लिए अब ‘दिल्ली मॉडल’ (मंत्रालयों का दबाव) का सहारा लिया जा रहा है?
​कानून के शिकंजे से बचने के लिए क्या खुद को ‘पीड़ित’ (Victim Card) दिखाना अब नया हथियार बन चुका है?
​…और सबसे बड़ा सवाल—अगर सब कुछ झूठ और साजिश है, तो फिर रात के अंधेरे में खबरें हटाने का दबाव क्यों?

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button