के.जी.एम.यू में नहीं सुधर रही व्यवस्थाएं दिव्यांगों,वृद्ध,सैनिकों और पत्रकारों के काउंटर पर भी आम लोगों की रहती है भीड़।

के.जी.एम.यू में नहीं सुधर रही व्यवस्थाएं दिव्यांगों,वृद्ध,सैनिकों और पत्रकारों के काउंटर पर भी आम लोगों की रहती है भीड़।
लखनऊ स्थित मेडिकल कॉलेज घोर अनियमितताओं का है शिकार दिव्यांगों,वृद्ध,सैनिकों और पत्रकारों हेतु आरक्षित काउंटर पर भी जुटी रहती है आम मरीजों की भीड़ जिसके कारण वृद्धजन,सैनिक,दिव्यांग और पत्रकारों को खानी पड़ती हैं दर दर की ठोकरे दिव्यांग और वृद्धजन परेशान होकर और अधिक बीमार हो जाते हैं वहीं सैनिकों और पत्रकारों का समय व्यर्थ होता है साथ ही इन आरक्षित काउंटर पर सुरक्षा में लगे कर्मी और कुछ अन्य व्यक्ति भी अपने परिचय से कुछ जुगाड करने वाले मरीजों के परिजनों से मिल कर इन काउंटर पर अंदर या बाहर से आकर इन लोगों को सुविधा पहुंचाते हैं जिससे लाइन में लगे लोगों का समय खराब होता है और काम में अनावश्यक देरी होती है मुख्य मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के निरंतर निर्देशों के बावजूद कर्मचारियों पर नहीं होता कोई असर सुविधा और परिचय का बोलबाला है आम मरीज फुटबॉल की तरह इधर से उधर भटकता रहता है एक दिन का काम चार दिन में होता है अधिकतर कर्मचारी टालमटोली कर एक विंडो से दूसरी विंडो पर जाने कि सलाह देते दिखाई देते हैं और स्वयं मोबाइल पर व्यस्त रहते हैं या दो चार लोग बैठ कर आपस में चोंच लड़ाते रहते हैं।कर्मचारियों कि मनमानी चरम पर है समय समय पर इस प्रकार की अव्यवस्थाओं के समाचार समाचार पत्रों में चपटे रहते हैं किंतु विभाग के अधिकारियों के ढुलमुल रवैये से सुधार कहीं से नहीं दिखता पियोन,क्लर्क,नर्सेज,सुरक्षा कर्मी और यहां तक जूनियर डॉक्टर्स भी एक दूसरे के साथ अनुशासनात्मक और अपने पद कि गरिमा न रख कर एक ही लीक पर एक दूसरे से मिले रहते है छोटे बड़े डॉक्टर नर्स क्लर्क या सुरक्षा कर्मी चपरासी का कोई अनुशासन नहीं दिखाई पड़ता।

