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सलेमपुर बघाई : जन्म-जन्मांतर के संस्कार जागृत होते है तब संतों का सानिध्य प्राप्त होता है- महात्मा सुजाता बाई जी

जन्म-जन्मांतर के संस्कार जागृत होते है तब संतों का सानिध्य प्राप्त होता है- महात्मा सुजाता बाई जी

सलेमपुर बघाई में सद्भावना सत्संग ज्ञानयज्ञ के तीसरे दिन संतों ने दिया सद्भावना का संदेश

सलेमपुर बघाई, 22 अप्रैल। सलेमपुर बघाई में आयोजित सात दिवसीय ‘श्रीमद् भागवत सद्भावना सत्संग ज्ञानयज्ञ’ के तीसरे दिन तीर्थंनगरी प्रयागराज से पधारे पूज्य महात्मा सारथानंद जी ने श्रीमदभागवत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भागवत का असली महत्व यही है कि आप यहां सच्चे संतों के सानिध्य में बैठकर अमृतपान कर रहें है।

उन्होंने भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के बारे में भी विस्तार से बताया और कहा कि कलिकाल के प्रभाव से लम्बी यात्रा करने पर वृन्दावन-मथुरा पहुंचते ही भक्ति युवा अवस्था को अर्थात जवान हो गयी और उसके दोनों बेटे ज्ञान और वैराग्य बूढ़े हो गए अर्थात निष्क्रिय हो गए।

बलिया से पधारे महात्मा सूर्यानन्द जी ने भक्त समुदाय को सम्बोधित करते हुए कहा कि भक्ति करना कोई बच्चों का खेल नहीं है। “भक्ति करें कोई सुरमा, जाति, वर्ण, कुल खोय” अर्थात ज़ब तक हमारे ऊपर तेरा-मेरी, ऊंच-नीच, छोटे-बड़े का नशा रहेगा तब हम भक्ति नहीं कर पाएंगे। क्योंकि भगवान कहते है कि मेरा केवल भक्ति का नाता है, जो मेरी भक्ति करता है वह मुझे अति प्रिय है और उसी भक्त का मै ख्याल रखता हूँ।

बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी (वाराणसी) से आए महात्मा सुजाता बाई जी ने सपने सार गर्भित सत्संग विचार रखते हुए कहा कि ज़ब हमारे जन्म-जन्मांतर के संस्कार जागृत होते है तब संतों का सानिध्य प्राप्त होता है, और ज़ब सच्चे संत मिलते है तब भगवान से मिलने का रास्ता बताते है। गाजीपुर प्रभारी महात्मा दयावती बाई जी ने अपने ज्ञानवर्धक उद्बोधन से पांडाल में उपस्थित भक्तों को लाभान्वित किया।

हवन-पूजन व भंडारा:

यह सात दिवसीय ज्ञानयज्ञ के आज तीसरे दिन आरती पूजन व विशाल भंडारे के साथ कार्यक्रम को विश्राम किया गया। अनेक आचार्यजनों ने विधिवत मन्त्रोंच्चारण के साथ पूजन अर्चन किया। आयोजकों ने समस्त धर्मप्रेमी जनता से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।

अतिथि स्वागत:

श्री रामाश्रय सिंह यादव, डॉ. संतोष यादव(ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि सादात), अरविन्द कुमार यादव, श्री काशीनाथ यादव जी(मास्टर जी), नन्दलाल पाल, अशोक जायसवाल जी, सुभाष चौहान और समिति के शाखा कार्यकर्ता व मानव सेवा दल के अनेक स्वयंसेवक सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहें।

इस दौरान आचार्य सुनील पाण्डेय रेवती, आचार्य रजनीश उपाध्याय, पंडित अमन तिवारी, पंडित आशुतोष पाण्डेय, वेदाचार्य आशीष उपाध्याय, वेदविभूषण पंकज ओझा और गोलू मिश्रा ने मन्त्रोंचारण के साथ विधिवत पूजा अर्चना की। मंचासीन सभी पूज्य संत-महात्मागणों का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। आरती-प्रसाद के साथ कार्यक्रम को विश्राम किया गया। तत्पश्चात् भोजन-भंडारे का सभी ने लाभ उठाया। मंच संचालन डॉ. संतोष कुमार यादव जी ने किया।

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