
पोषण कार्यक्रमों में लापरवाही पर डीएम सख्त, तीन सीडीपीओ को स्पष्टीकरण जारी करने के निर्देश
जिला पोषण समिति की बैठक में अनुपस्थित प्रगति पर जताई नाराजगी, 50 अधिकारियों को वीएचएसएनडी सत्रों की निगरानी की जिम्मेदारी
गाजीपुर, 31 अक्टूबर 2026। कलेक्ट्रेट सभागार में शनिवार को जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला की अध्यक्षता में जिला पोषण समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में संचालित पोषण कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने एफआरएस, पोषण ट्रैकर, टेक होम राशन (टीएचआर) तथा वीएचएसएनडी सत्रों का शत-प्रतिशत आयोजन सुनिश्चित कराने पर विशेष जोर दिया।बैठक के दौरान पोषण ट्रैकर पर होम विजिट की खराब प्रगति सामने आने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने करंडा, भांवरकोल एवं मोहम्मदाबाद के बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) को स्पष्टीकरण जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही पोषण संबंधी गतिविधियों की जमीनी स्तर पर निगरानी के लिए जनपद स्तर से 50 अधिकारियों की तैनाती कर 50 अलग-अलग वीएचएसएनडी सत्रों का निरीक्षण कराने का निर्णय लिया गया।जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि प्रत्येक बुधवार को जनपद में 300 स्थानों पर वीएचएसएनडी सत्र आयोजित किए जाएं। इन सत्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं बच्चों को मिलने वाली स्वास्थ्य और पोषण संबंधी सुविधाओं की नियमित निगरानी की जाए। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों पर उपलब्ध वेइंग मशीनों की स्थिति की जानकारी लेते हुए सभी केंद्रों पर आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने को कहा।बैठक में प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को समय से लाभ उपलब्ध कराने तथा इसकी नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी संबंधित कर्मचारियों को पोषण ट्रैकर पर सूचनाओं की फीडिंग निर्धारित समय के भीतर पूर्ण करने को कहा, ताकि योजनाओं की वास्तविक प्रगति का सही आकलन किया जा सके।बैठक में गंभीर तीव्र कुपोषित (एसएएम) एवं मध्यम तीव्र कुपोषित (एमएएम) बच्चों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि अभियान चलाकर सप्ताह में कम से कम एक बार सभी चिह्नित बच्चों का वजन एवं लंबाई अथवा ऊंचाई मापी जाए। इससे कम वजन और कम ऊंचाई वाले बच्चों की समय रहते पहचान कर उनकी पोषण स्थिति का नियमित आकलन किया जा सकेगा।उन्होंने एसएएम बच्चों का सही ढंग से चिह्नांकन करने तथा उनकी संख्या में कमी लाने के लिए प्रभावी प्रयास करने पर जोर दिया। साथ ही बच्चों के पोषण स्तर में सुधार की प्रगति का नियमित अनुश्रवण करने के निर्देश दिए, ताकि कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए समयबद्ध कार्रवाई की जा सके।इसके अतिरिक्त जिलाधिकारी ने जर्जर अवस्था में संचालित कार्यालय भवनों का नियमानुसार ध्वस्तीकरण कराने तथा बाल गृह में आवश्यक पेंटिंग एवं साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पोषण एवं बाल विकास से जुड़ी योजनाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी अधिकारी और कर्मचारी निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप कार्य करते हुए योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना सुनिश्चित करें।



