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अभियोजन की समीक्षा बैठक में दोषियों को सजा दिलाने और गवाहों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने पर जोर

सितंबर माह में 71 वादों का हुआ निस्तारण, 30 मामलों में अभियुक्तों को मिली सजा; हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो के मामलों में आजीवन कारावास व 20 वर्ष तक की सजा

अभियोजन की समीक्षा बैठक में दोषियों को सजा दिलाने और गवाहों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने पर जोर

 

सितंबर माह में 71 वादों का हुआ निस्तारण, 30 मामलों में अभियुक्तों को मिली सजा; हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो के मामलों में आजीवन कारावास व 20 वर्ष तक की सजा

 

गाजीपुर, 31 अक्टूबर 2026। जिले में लंबित आपराधिक मुकदमों के शीघ्र निस्तारण और अपराधियों को न्यायालय से सजा दिलाने के उद्देश्य से शनिवार को राइफल क्लब सभागार में मुख्य राजस्व अधिकारी की अध्यक्षता में अभियोजन कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अभियोजन की प्रगति, न्यायालयों में गवाहों की उपस्थिति, सम्मन एवं वारंट के तामीला तथा दोषसिद्धि की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों ने अभियोजन से जुड़े अधिकारियों और शासकीय अधिवक्ताओं को मुकदमों की प्रभावी पैरवी कर अधिक से अधिक मामलों में दोषियों को सजा दिलाने के निर्देश दिए।समीक्षा के दौरान बताया गया कि सितंबर 2026 में अधीनस्थ न्यायालयों में भारतीय दंड संहिता के तहत कुल 64 वादों का निस्तारण किया गया। इनमें 23 मामलों में अभियुक्तों को सजा हुई, जबकि 16 मामले सुलह तथा 25 मामले कमिट के आधार पर निस्तारित किए गए। वहीं अन्य अधिनियमों के अंतर्गत सात वादों का निस्तारण हुआ और सभी सात मामलों में अभियुक्तों को सजा सुनाई गई। इस प्रकार समीक्षा में कुल 71 वादों के निस्तारण की जानकारी दी गई।बैठक में सम्मन और वारंट के तामीला की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई। अधीनस्थ न्यायालयों में कुल 410 सम्मन एवं वारंट जारी किए गए थे, जिनके सापेक्ष 356 का तामीला कराया गया। तामीला के बाद 271 गवाह न्यायालय में उपस्थित हुए, जिनमें से 266 गवाहों की गवाही दर्ज कराई गई। पांच गवाह पीठासीन अधिकारियों के अवकाश तथा अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण परीक्षित नहीं हो सके।इसी तरह सत्र न्यायालयों में गवाहों को बुलाने के लिए 554 सम्मन जारी किए गए, जिनमें से 426 का तामीला हुआ। इसके सापेक्ष 315 गवाह न्यायालय में उपस्थित हुए और 300 गवाहों की गवाही दर्ज कराई गई। शेष 15 गवाह अधिवक्ताओं की हड़ताल और पीठासीन अधिकारियों के अवकाश के कारण परीक्षित नहीं हो सके।मुख्य राजस्व अधिकारी ने कहा कि सम्मन और वारंट का समय से तामीला नहीं होने के कारण गवाह न्यायालय में उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं, जिससे मुकदमों के निस्तारण में देरी होती है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि गवाहों को जारी सम्मन का अधिक से अधिक तामीला कराया जाए और उनकी शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि समय से गवाही दर्ज कराकर मामलों का निस्तारण किया जा सके।बैठक में सितंबर माह के दौरान विभिन्न न्यायालयों द्वारा अभियुक्तों को सुनाई गई सजाओं का भी विवरण प्रस्तुत किया गया। इसमें थाना जीआरपी के एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में अमरजीत बिंद को एक वर्ष के कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। थाना जमानियां के वर्ष 2008 के एक मामले में श्रीराम को आठ वर्ष के सश्रम कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया।थाना नगसर हाल्ट के हत्या के मामले में लाल बहादुर को आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। वहीं थाना भुड़कुड़ा के हत्या के मामले में धमेन्द्र राजभर को आजीवन कारावास से दंडित किया गया। थाना गहमर के दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामले में कृष्णा दूबे को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।इसके अतिरिक्त थाना सैदपुर के दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट के मामले में रोहित यादव को 20 वर्ष के कठोर कारावास तथा थाना नोनहरा के दुष्कर्म से जुड़े मामले में संजीव राय उर्फ अन्नू को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। थाना मरदह के गैंगस्टर एक्ट से संबंधित मामले में रामकेवल का वाद भी सितंबर माह में निस्तारित किया गया।मुख्य राजस्व अधिकारी ने जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) एवं लोक अभियोजकों को निर्देश दिया कि जिन मामलों में अभियुक्त रिहा हुए हैं, उनकी दोबारा विधिवत समीक्षा की जाए। यदि सरकारी हित में अपील करना उचित हो तो संबंधित मामलों में अपील का प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत किया जाए। जिन मुकदमों में गवाह पक्षद्रोही हो रहे हैं, उनमें नियमानुसार उनके विरुद्ध मुकदमा चलाकर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में गवाह अपने बयान से पीछे न हटें।उन्होंने सभी अभियोजकों को प्रत्येक माह कम से कम एक मुकदमे की केस डायरी तैयार करने का निर्देश दिया। इसमें पुलिस विवेचना के दौरान हुई त्रुटियों और कमियों को दर्ज किया जाएगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन कमियों के कारण न्यायालय में सरकार के विरुद्ध आदेश पारित हुआ। इन बिंदुओं की समीक्षा कर विवेचना और अभियोजन की कार्यप्रणाली में सुधार किया जा सकेगा।बैठक में स्पष्ट किया गया कि प्रभावी पैरवी, समय से सम्मन तामीला, गवाहों की नियमित उपस्थिति और विवेचना की कमियों को दूर करके ही आपराधिक मामलों का शीघ्र निस्तारण तथा दोषियों को सजा दिलाना सुनिश्चित किया जा सकता है।

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