
पॉक्सो एक्ट के प्रति छात्र-छात्राओं को किया जागरूक ,साक्षरता शिविर में न्यायिक अधिकारियों ने यौन अपराधों और सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल की दी जानकारी

गाजीपुर। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश एवं जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गाजीपुर के आदेश पर बुधवार को जिले के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में साक्षरता शिविर आयोजित कर छात्र-छात्राओं को कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।शिविर का आयोजन जीजीआईसी इंटर कॉलेज, डीएवी इंटर कॉलेज, शंकर बालिका इंटर कॉलेज, लूर्दस कान्वेंट स्कूल, वेद इंटरनेशनल स्कूल सैदपुर तथा एमजेआरपी स्कूल गाजीपुर में किया गया। इसमें न्यायिक अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को बाल संरक्षण और कानून संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी।न्यायिक अधिकारियों ने बताया कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन शोषण, यौन उत्पीड़न तथा पोर्नोग्राफी जैसे अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए पॉक्सो अधिनियम लागू किया गया है। छात्र-छात्राओं को उनके कानूनी अधिकारों और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना होने पर शिकायत करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई।शिविर में छात्राओं को सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल के प्रति भी जागरूक किया गया। न्यायिक अधिकारियों ने सलाह दी कि छात्राएं अपनी निजी तस्वीरें इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (ट्विटर) सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर साझा करने से बचें। साथ ही किसी अनजान व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार या उसे फॉलो नहीं करने की अपील की गई।उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का यौन उत्पीड़न अथवा अश्लील व्यवहार होने पर छात्राएं चुप न रहें और तत्काल अपने अभिभावकों, शिक्षकों अथवा संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दें। शिविर में नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100 के संबंध में भी जानकारी दी गई तथा बताया गया कि विधिक सहायता के लिए इस माध्यम से संपर्क किया जा सकता है।विद्यालय के प्रधानाचार्यों की ओर से भी छात्राओं से अपील की गई कि यदि कोई अनजान व्यक्ति अश्लील हरकत करता है, गंदे इशारे करता है या किसी प्रकार से परेशान करता है तो घटना को छिपाने के बजाय समय रहते अपनी शिक्षिका अथवा माता-पिता को इसकी जानकारी दें। समय पर सूचना मिलने से ऐसी घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है।साक्षरता शिविर के माध्यम से छात्र-छात्राओं को कानून की जानकारी देने के साथ ही उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और किसी भी प्रकार के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया गया।



