जखनिया (गाजीपुर) : विश्व विख्यात सिद्धपीठ हथियाराम मठ में श्रद्धा, भक्ति और गुरु-तत्व का महासंगम, गुरु पूर्णिमा पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब

विश्व विख्यात सिद्धपीठ हथियाराम मठ में श्रद्धा, भक्ति और गुरु-तत्व का महासंगम, गुरु पूर्णिमा पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब
महामंडलेश्वर पीठाधीश्वर पूज्य भवानी नंदन यति महाराज ने गुरु-शिष्य परंपरा का बताया सनातन धर्म का प्राण, देशभर से पहुंचे श्रद्धालु

जखनिया (गाजीपुर)तहसील जखनिया स्थित ऐतिहासिक एवं विश्व विख्यात सिद्धपीठ हथियाराम मठ में बुधवार को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। पूज्य महामंडलेश्वर एवं पीठाधीश्वर श्री भवानी नंदन यति महाराज के सान्निध्य में आयोजित इस भव्य समारोह में गाजीपुर सहित देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु एवं शिष्य मठ पहुंचे। पूरा मठ परिसर रंग-बिरंगी आकर्षक सजावट, पुष्प मालाओं और धार्मिक ध्वजों से दुल्हन की तरह सुसज्जित था। चारों ओर गूंज रहे वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और जयघोष ने वातावरण को पूर्णतः भक्तिमय बना दिया।कार्यक्रम का शुभारंभ पूज्य महाराज श्री ने अपने परम पूज्य गुरु ब्रह्मलीन महाराज श्री बालकृष्ण यति जी महाराज के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर एवं पुष्पांजलि अर्पित करते हुए किया। काशी से पधारे प्रकांड वैदिक विद्वानों के मंत्रोच्चार के बीच गुरु पूजन एवं वैदिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। इसके बाद गुरु वंदना, भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक प्रवचनों का क्रम प्रारंभ हुआ।अपने प्रेरणादायी आशीर्वचन में महामंडलेश्वर श्री भवानी नंदन यति महाराज ने कहा कि गुरु केवल शिक्षा देने वाले नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाले प्रकाश स्तंभ हैं। गुरु वह दिव्य शक्ति हैं, जो शिष्य के भीतर छिपी चेतना को जागृत कर उसे सत्य, धर्म और आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर करती है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति की आत्मा गुरु-शिष्य परंपरा में ही निहित है और जब तक यह परंपरा जीवित रहेगी, तब तक भारतीय संस्कृति का वैभव अक्षुण्ण बना रहेगा।महाराज श्री ने आगे कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता, समर्पण और श्रद्धा व्यक्त करने का पावन अवसर है। गुरु का आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। जिस शिष्य के जीवन में गुरु का मार्गदर्शन होता है, उसका जीवन सदैव सफल और सार्थक बनता है।समारोह में मंच पर अनेक संत-महात्मा, विशिष्ट अतिथि एवं धर्मप्रेमी जन गरिमामयी उपस्थिति में रहे। इस अवसर पर प्रसिद्ध भजन गायकों द्वारा प्रस्तुत भक्ति गीतों और गुरु महिमा से ओत-प्रोत भजनों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। पूरा परिसर “जय गुरुदेव”, “हर-हर महादेव” और वैदिक मंत्रों के उद्घोष से गूंजता रहा।गुरु पूर्णिमा महोत्सव में गाजीपुर जनपद के अलावा उत्तर प्रदेश,तथा देश के अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और अनुयायी पहुंचे। पूज्य महाराज श्री ने सभी श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया तथा समाज में प्रेम, सेवा, सद्भाव और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।कार्यक्रम की सुव्यवस्थित व्यवस्था के लिए मठ प्रशासन एवं स्वयंसेवकों द्वारा व्यापक प्रबंध किए गए थे। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए पुलिस एवं प्रशासन की ओर से भी पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था तैनात रही।धार्मिक कार्यक्रम के समापन पर पूज्य महाराज श्री के आशीर्वचन के उपरांत विशाल भंडारे एवं महाप्रसाद का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।गुरु पूर्णिमा का यह भव्य आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय सनातन संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता का अनुपम संगम बनकर उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया। श्रद्धा, भक्ति और गुरु कृपा से ओत-प्रोत यह आयोजन सिद्धपीठ हथियाराम मठ की आध्यात्मिक गरिमा एवं सनातन परंपरा की दिव्यता का जीवंत प्रतीक बन गया।



