गाजीपुर : कम वर्षा की आशंका को देखते हुए किसानों को दी गई वैकल्पिक खेती अपनाने की सलाह

कम वर्षा की आशंका को देखते हुए किसानों को दी गई वैकल्पिक खेती अपनाने की सलाह
अंधऊ पंचायत भवन में आयोजित गोष्ठी में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, केसीसी और पशुपालन योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी

गाजीपुर। सदर विकास खंड की ग्राम पंचायत अंधऊ स्थित पंचायत भवन में शनिवार को आसन्न सूखे की संभावना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के संबंध में एक जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि, बैंकिंग एवं पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने किसानों को बदलते मौसम के अनुरूप खेती, फसल सुरक्षा तथा सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।गोष्ठी को संबोधित करते हुए उप कृषि निदेशक विजय कुमार ने कहा कि इस वर्ष कम वर्षा अथवा सूखे की आशंका को देखते हुए किसानों को धान के स्थान पर कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों जैसे उड़द, मूंग, अरहर, ज्वार, बाजरा और मक्का की खेती पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन किसानों के पास सिंचाई की व्यवस्था है, वे भी कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली तकनीकों को अपनाएं।उन्होंने किसानों को धान की सीधी बुआई (डायरेक्ट सीडेड राइस) अपनाने की सलाह देते हुए बताया कि धान की नर्सरी तैयार कर रोपाई करने के बजाय पर्याप्त नमी वाले खेतों में सीधे बीज बोने की तकनीक सफल साबित हुई है। इससे समय, श्रम और लागत में कमी आती है तथा उत्पादन भी बेहतर प्राप्त होता है।इस अवसर पर अग्रणी जिला प्रबंधक, यूनियन बैंक, राजदेव ने किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के महत्व की जानकारी देते हुए कहा कि किसान मात्र चार प्रतिशत ब्याज पर केसीसी बनवा सकते हैं। उन्होंने बताया कि केसीसी धारकों का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बीमा स्वतः हो जाता है। यदि कोई किसान केसीसी नहीं बनवाना चाहता है, तब भी उसे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ अवश्य लेना चाहिए, ताकि प्राकृतिक आपदा अथवा सूखे की स्थिति में आर्थिक क्षतिपूर्ति प्राप्त हो सके।मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. ए. के. शाही ने किसानों से खेती के साथ-साथ पशुपालन को भी आय का प्रमुख स्रोत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि किसान अपने पशुओं के लिए भी किसान क्रेडिट कार्ड बनवा सकते हैं तथा बकरी पालन, भेड़ पालन और मुर्गी पालन जैसी योजनाओं से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।उन्होंने विभाग की बकरी पालन योजना की जानकारी देते हुए बताया कि एक बकरा और पांच बकरियों की छोटी यूनिट के लिए लगभग 60 हजार रुपये की लागत आती है, जिसमें लाभार्थी को केवल 6 हजार रुपये का अंशदान करना होता है, जबकि शेष 54 हजार रुपये सरकार सब्सिडी के रूप में उपलब्ध कराती है। इसके अलावा उन्होंने छोटी यूनिट से लेकर 500 बकरियों तक की परियोजनाओं, मिनी नंदिनी योजना तथा पशुपालन विभाग की अन्य लाभकारी योजनाओं की भी विस्तृत जानकारी किसानों को दी।गोष्ठी में उपस्थित किसानों ने अधिकारियों से विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्राप्त की तथा बदलती जलवायु परिस्थितियों में वैज्ञानिक खेती अपनाने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का संकल्प लिया।



