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इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन: पूर्व ADG प्रशांत कुमार से मांगा स्पष्टीकरण, 48 घंटे का दिया अल्टीमेटम

इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन: पूर्व ADG प्रशांत कुमार से मांगा स्पष्टीकरण, 48 घंटे का दिया अल्टीमेटम

इलाहाबाद: प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा की गरिमा को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक कड़ा संदेश दिया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पूर्व एडीजी (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार को नोटिस जारी कर एक आधिकारिक संचार (Official Communication) में कथित तौर पर इस्तेमाल की गई ‘अभद्र और आपत्तिजनक भाषा’ पर स्पष्टीकरण मांगा है।

​मामला क्या है?

यह आदेश न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने अमित कुमार सिंह उर्फ सोनू द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि पूर्व एडीजी ने आधिकारिक पत्राचार के दौरान जिस शब्दावली का प्रयोग किया, वह एक वरिष्ठ अधिकारी के पद और गरिमा के अनुकूल नहीं थी। कोर्ट ने इसे संज्ञान में लेते हुए इसे ‘अनुचित’ माना है।

​कोर्ट का सख्त निर्देश:

न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM), लखनऊ को विशेष निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार:

नोटिस को 48 घंटे के भीतर डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) के माध्यम से संबंधित अधिकारी तक पहुंचाया जाना अनिवार्य है।

​डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि नोटिस की तामील समय सीमा के भीतर हो।

​रजिस्ट्रार (अनुपालन) को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे इस आदेश की जानकारी तत्काल संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएं।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा:

अदालत के इस रुख को प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक कड़े सबक के रूप में देखा जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी पद पर बैठे अधिकारियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने आधिकारिक पत्राचार में शालीनता और स्पष्टता बनाए रखें। कोर्ट का यह हस्तक्षेप स्पष्ट करता है कि पद की गरिमा के विरुद्ध भाषा का उपयोग न्यायालय बर्दाश्त नहीं करेगा।

​अगली सुनवाई:

मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पूर्व एडीजी इस पर अपना क्या स्पष्टीकरण पेश करते हैं।

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