गोरखपुर: दोहरी पहचान और फर्जीवाड़े के खेल में आरोपी को मिला HC से स्टे, पीड़ित ने अब लगाई न्याय की गुहार

गोरखपुर: दोहरी पहचान और फर्जीवाड़े के खेल में आरोपी को मिला HC से स्टे, पीड़ित ने अब लगाई न्याय की गुहार
गोरखपुर के पिपराइच ब्लॉक स्थित ग्राम जादोपुर से दोहरी पहचान और सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर का एक गंभीर मामला सामने आया है। गांव के निवासी सुमोद सिंह की शिकायत पर हुई प्रशासनिक जांच में खुलासा हुआ कि रामप्रीत यादव (पुत्र लालबचन यादव) छत्तीसगढ़ में ‘रामसुन्दर’ (पुत्र प्रेमनरायन) के नाम से दूसरी पहचान बनाकर नौकरी कर रहा है।
जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि और पुलिस कार्रवाई
कमिश्नर के आदेश पर एसडीएम सदर (IAS मृणालिनी अवस्थी) और PD DRDA द्वारा की गई जांच में जालसाजी की पुष्टि हुई:
परिवार रजिस्टर में हेरफेर (2009): मूल परिवार रजिस्टर में फर्जी तरीके से ‘रामसुन्दर’ का नाम जोड़कर नौकरी दर्ज की गई।
फर्जी मकान नंबर (2008): मकान सं. 02 (जो वास्तव में सुखारी गुप्ता का है) पर फर्जी रजिस्टर तैयार कर लालबचन उर्फ प्रेमनरायन दर्ज किया गया।
मामले में थाना पिपराइच में मुकदमा (सं. 764/2025) दर्ज कर पुलिस ने धारा 419, 420, 467, 468, 471 IPC के तहत चार्जशीट दाखिल कर दी है। इसके अलावा, फर्जीवाड़े में शामिल पिपराइच ब्लॉक के एडीओ पंचायत अवरिन्द्र तिवारी और तत्कालीन सचिवों पर भी कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
हाई कोर्ट से स्टे और पीड़ित के गंभीर आरोप
आरोपी ने हाई कोर्ट में यह हलफनामा देकर गिरफ्तारी पर स्टे ले लिया कि “रामप्रीत यादव” और “लालबचन” केवल उसके और उसके पिता के उपनाम (Surnames) हैं।
दूसरी ओर, पीड़ित सुमोद सिंह ने तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं:
एकतरफा आदेश की धमकी: आरोप है कि तहसीलदार (सत्यप्रकाश गुप्ता) विपक्षी के साक्ष्य और जिरह दर्ज किए बिना ही एकतरफा फैसला सुनाने की बात कह रहे हैं।
प्रार्थना पत्र खारिज: विपक्षी के साक्ष्य व जिरह की मांग वाला पीड़ित के अधिवक्ता का आवेदन खारिज कर दिया गया है और पत्रावली की नकल भी नहीं दी जा रही।
न्याय की गुहार
मामले में अगली सुनवाई 18 अगस्त 2026 को तय की गई है। पीड़ित ने मुख्यमंत्री, कमिश्नर और जिलाधिकारी गोरखपुर से मांग की है कि नियमानुसार विपक्षी के साक्ष्य व जिरह दर्ज कराने के बाद ही तहसील न्यायालय की सुनवाई आगे बढ़ाई जाए।


