गुरुग्राम : सावन में भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए समाजसेवी मयंक शर्मा के सान्निध्य में भव्य महारुद्र यज्ञ, शिवमय हुआ गुरुग्राम

रिपोर्टर इंडिया नाउ 24 सुरेंद्र गुरुग्राम
सावन में भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए समाजसेवी मयंक शर्मा के सान्निध्य में भव्य महारुद्र यज्ञ, शिवमय हुआ गुरुग्राम

गुरुग्राम, संवाददाता। सावन के पावन माह में भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने तथा विश्व शांति, राष्ट्र की उन्नति और जनकल्याण की कामना के उद्देश्य से सेक्टर-43 स्थित वजीराबाद के खोखरा जोहड़ प्राचीन हनुमान मंदिर में कुरुक्षेत्र के समाजसेवी शर्मा परिवार के सौजन्य से भव्य महारुद्र यज्ञ का आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति के साथ किया जा रहा है। यज्ञ में प्रतिदिन विद्वान आचार्यों एवं ब्राह्मणों द्वारा वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार मंत्रोच्चारण के बीच भगवान शिव के शिवलिंग का अलग-अलग स्वरूपों में विशेष रुद्राभिषेक कराया जा रहा है।
हिंदू धर्म में श्रावण मास को भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस माह में श्रद्धापूर्वक की गई शिव उपासना, रुद्राभिषेक और महारुद्र यज्ञ से भगवान भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इसी भावना के साथ आयोजित इस अनुष्ठान में प्रतिदिन दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल, पंचामृत, बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन और सुगंधित पुष्पों से भगवान शिव का विधिवत अभिषेक किया जा रहा है।
यज्ञ स्थल पर गूंज रहे वैदिक मंत्र, ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष पूरे वातावरण को भक्तिमय बना रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन मंदिर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर यज्ञ में आहुति अर्पित कर धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा, भाईचारे और आध्यात्मिक चेतना का संचार करते हैं।
युवा समाजसेवी मयंक शर्मा ने कहा कि सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सर्वोत्तम अवसर है। महारुद्र यज्ञ का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं, बल्कि समाज में सनातन संस्कृति, सेवा, सद्भाव और संस्कारों को मजबूत करना भी है। उन्होंने कहा कि जब धर्म और सेवा साथ चलते हैं, तभी समाज में सुख, शांति और समृद्धि का वातावरण बनता है।
मयंक शर्मा लंबे समय से सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ सामाजिक सेवा में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे निस्वार्थ भाव से जरूरतमंद, गरीब एवं असहाय लोगों की सहायता कर मानव सेवा को ही ईश्वर सेवा मानते हैं। उनका मानना है कि युवा पीढ़ी यदि अपने धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाए, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
धर्माचार्यों ने कहा कि महारुद्र यज्ञ और रुद्राभिषेक से वातावरण की शुद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। ऐसे आयोजन समाज को धर्म, सेवा, संस्कार और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
खोखरा जोहड़ प्राचीन हनुमान मंदिर में आयोजित यह भव्य महारुद्र यज्ञ इन दिनों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। सावन के इस पावन अवसर पर धर्म, सेवा और सनातन संस्कृति का यह संगम समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है तथा युवा समाजसेवी मयंक शर्मा का सेवा और धर्म के प्रति समर्पण लोगों के बीच विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है।



