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लखनऊ में दिखा मुहर्रम का चांद: 17 जून से नए इस्लामी साल का आगाज, 26 जून को मनाया जाएगा आशूरा

लखनऊ में दिखा मुहर्रम का चांद: 17 जून से नए इस्लामी साल का आगाज, 26 जून को मनाया जाएगा आशूरा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुहर्रम का चांद नजर आ गया है। शिया मरकजी चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि बुधवार, 17 जून से पहला मुहर्रम यानी इस्लामी नए साल की शुरुआत होगी। इसके साथ ही, मुहर्रम का 10वां दिन यानी ‘आशूरा’ 26 जून को मनाया जाएगा।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर धर्मगुरुओं और प्रशासन के बीच अहम बैठक

​मुहर्रम के पवित्र महीने को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए मुस्लिम धर्मगुरुओं और शासन-प्रशासन के आला अधिकारियों के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक हुई।

विशेष सुरक्षा की मांग: धर्मगुरुओं ने बैठक में शहर के ऐतिहासिक इमामबाड़ों—छोटा इमामबाड़ा, बड़ा इमामबाड़ा और रूमी गेट समेत अन्य संवेदनशील स्थलों पर विशेष सुरक्षा बल तैनात करने की मांग की।

ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी: प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि पूरे पुराने लखनऊ क्षेत्र में पर्याप्त पुलिस बल मुस्तैद रहेगा। चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए पैनी नजर रखी जाएगी।

​असामाजिक तत्वों पर सख्ती: सोशल मीडिया पर भ्रामक या माहौल खराब करने वाली पोस्ट डालने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। भीड़ नियंत्रण और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सिविल डिफेंस की भी मदद ली जाएगी।

जुलूस के रूट में बदलाव और तैयारियां

लखनऊ में मुहर्रम के दौरान निकलने वाले पारंपरिक जुलूसों का अपना एक ऐतिहासिक महत्व है। मुख्य रूप से बड़ा इमामबाड़ा से शुरू होकर कई जुलूस रूमी गेट होते हुए छोटा इमामबाड़ा तक जाते हैं।

हटाए गए पिलर: जुलूस के दौरान हाथियों, ऊंटों, घोड़ों और बड़ी संख्या में पैदल अकीदतमंदों (श्रद्धालुओं) की आवाजाही होती है। इसे ध्यान में रखते हुए रूमी गेट के नीचे से सभी छोटे और पत्थर के पिलर हटा दिए गए हैं ताकि जुलूस बिना किसी बाधा के सुरक्षित गुजर सके।

यातायात व्यवस्था: आम जनता के आवागमन के लिए रूमी दरवाजे के बगल से एक वैकल्पिक रास्ता पहले ही खोला जा चुका है। सुरक्षा कारणों से भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए आगे और पीछे छोटे पिलर लगाए गए थे, जिन्हें जुलूस के मद्देनजर अब व्यवस्थित किया जा रहा है।

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