सियासत की भेंट चढ़ा बचपन: लखीमपुर खीरी में स्कूली छात्राओं को सड़क पर उतारकर किया गया प्रदर्शन, जिम्मेदार कौन?

सियासत की भेंट चढ़ा बचपन: लखीमपुर खीरी में स्कूली छात्राओं को सड़क पर उतारकर किया गया प्रदर्शन, जिम्मेदार कौन?
लखीमपुर खीरी: क्या शिक्षा के मंदिरों का काम अब बच्चों को पढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें राजनीतिक रैलियों और प्रदर्शनों में ढाल बनाना है? लखीमपुर खीरी से आई एक तस्वीर इस समय चर्चा का विषय बनी हुई है, जहाँ स्कूल की ड्रेस पहनी नन्हीं छात्राओं के हाथों में शिक्षा की किताबें नहीं, बल्कि राजनीतिक तख्तियां दिखाई दीं।
सड़क पर क्यों हैं भविष्य की निर्माता?
वायरल हो रही इस तस्वीर में देखा जा सकता है कि स्कूली छात्राएं राजनीतिक प्रदर्शन का हिस्सा बनी हुई हैं। हाथों में राजनीतिक नारों वाली तख्तियां थामे इन बच्चों को देखकर हर कोई सवाल उठा रहा है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि स्कूल समय में इन बच्चों को राजनीतिक नारेबाजी के लिए सड़कों पर खड़ा कर दिया गया?
सवाल शिक्षा के हक और जिम्मेदारी पर
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है:
स्कूल प्रबंधन की चुप्पी: क्या स्कूल प्रशासन की अनुमति के बिना बच्चे यूनिफॉर्म में बाहर निकल सकते हैं? यदि यह सब स्कूल की जानकारी में हुआ है, तो यह शिक्षा व्यवस्था की एक बड़ी विफलता है।
राजनीतिक दलों की संवेदनशीलता: क्या राजनीतिक दल इतने गिर गए हैं कि उन्हें अपना एजेंडा पूरा करने के लिए अब मासूम बच्चों का सहारा लेना पड़ रहा है?
अभिभावकों की चिंता: जब माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं, तो वे उम्मीद करते हैं कि उनका बच्चा भविष्य की तैयारी कर रहा है, न कि किसी पार्टी विशेष का झंडा या पोस्टर थामकर सड़कों पर शोर मचा रहा है।
अधिकारों का उल्लंघन
नियमों के अनुसार, शैक्षिक संस्थानों को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। बच्चों का मन कोमल होता है और उन्हें राजनीतिक विवादों में झोंकना उनकी मानसिक स्थिति और भविष्य पर गलत असर डालता है। यह तस्वीर न केवल व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि उन लोगों की मानसिकता पर भी प्रहार करती है जो अपने निजी लाभ के लिए शिक्षा के पवित्र आंगन को राजनीतिक अखाड़ा बनाने में संकोच नहीं करते।
जिम्मेदार कौन?
इस प्रदर्शन के पीछे कौन है? क्या जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस मामले का संज्ञान लेगा? यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर लखीमपुर खीरी के हर नागरिक को चाहिए। बच्चों को पढ़ाना और उन्हें एक बेहतर भविष्य देना जिम्मेदारी है, उन्हें राजनीतिक मोहरा बनाना नहीं।
इस खबर के माध्यम से हम मांग करते हैं कि शिक्षा विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच करे और सुनिश्चित करे कि भविष्य में किसी भी बच्चे को शिक्षा के समय राजनीतिक गतिविधियों में शामिल न किया जाए।



