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हाय हैण्डसम’ का मंचन और नृत्य कार्यशाला के मनोहारी प्रदर्शन

हाय हैण्डसम’ का मंचन और नृत्य कार्यशाला के मनोहारी प्रदर्शन

लखनऊ, 1 जून। विवाह गुड्डे-गुड़िया का खेल नहीं, एक ऐसा संस्कार है जहां वंश को आगे बढ़ाने सहित कई जिम्मेदारियां निभाते हुए आगे बढ़ना होता है। हंसी ठहाकों के बीच ये संदेश सम्भव सेवा समिति के कलाकारों ने जयवर्धन के लिखे हास्य नाटक ‘हाय हैण्डसम’ ने दिया। लेखक जयवर्धन के लिखे इस नाटक का मंचन सुअंश सक्सेना अंकुर की परिकल्पना और निर्देशन में बलराज साहनी प्रेक्षागृह कैसरबाग में हुआ।

नाटक में दो जोड़ियां और एक बेहद मसखरा नौकर है। एक तरफ शादीशुदा सीधा सादा पुत्र स्वामी और फैशनपरस्ती और माडलिंग के शौक में पड़ी उसकी पत्नी मंदा है, जो मां बनकर अपना फिगर नहीं बिगाड़ना चाहती। उनके पास दूसरे के साथ वक्त दिखाने का समय नहीं है।दूसरी ओर विदुर फौजी कर्नल कपूर और उनकी विधवा समधिन सीता देवी हैं। कर्नल कपूर भले ही भले ही फौजी होने के नाते अनुशासन में बंधे हों, पर सीता देवी के सामने आते ही उनके दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं और वे दिलफेंक आशिक बनकर कोई भी मौका नहीं चूकते। फिर भी कर्नल कपूर और सीता देवी की चिंता एक ही है कि किसी तरह उनके आंगन में नन्हे बच्चे की किलकारियां गूंजें। स्वभाव से सीधा स्वामी चपल बुद्धि पत्नी मंदा को समझा नहीं पाता और न ही मंदा अपने मॉडलिंग के की शौक की वजह से कुछ समझने को तैयार है। वह तो घर गृहस्थी के कामों से भी कोसों दूर रहती है। खुशमिजाज नौकर कमाल घर के भारी माहौल को अपने चुटकीले अंदाज से सबके साथ हंसी मजाक कर हल्का बनाये रखता है। कमाल कभी स्वामी को मंदा का साथ पाने के लिए कोई जुगत बताता है तो कभी स्वामी को साधु संन्यासी बन कर मंदा का दिमाग ठिकाने लगाने की सलाह देता है। अकेलापन के मारे और एक छोटा बच्चा पाने की चाहत में विदुर कर्नल और उनकी विधवा समधिन सीता देवी का इश्क अंजाम तक पहुंचता है। दोनों शादी कर जिंदगी की नयी प्लानिंग करते हैं। उन दोनों की शादी लगा झटका स्वामी और मंदा की आंखें खोल देता है। नाटक के सुखद अंत में उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का अहसास होता है और वे जिम्मेदारियां निभाने का संकल्प लेते हैं।

प्रस्तुति में मंच पर स्वामी के रूप में शशांक पांडे, कर्नल कपूर तौर पर स्वयं निर्देशक सुअंश सक्सेना, मंदा- अनामिका चौहान, सीता देवी- शीलू मलिक और नौकर कमाल की भूमिका में
मंच पर विपिन कुमार ने चरित्र के अनुरूप अच्छा अभिनय किया।

मंच पार्श्व पक्षों में प्रकाश में राहुल कुमार, संगीत में संतोष कुमार, रूपसज् में जा शाहीर अहमद, मंच निर्माण में आशुतोष विश्वकर्मा, मंच सामग्री में प्रिंस कुमार, परिधान में श्रीमती सोनी और अन्य पक्षों में दिनेश कुमार गौतम व विक्रम बिष्ट का सराहनीय सहयोग रहा।

इनसेट

जन्मे हैं कृष्ण कन्हैया…..

इस अवसर पर नाट्य मंचन से पहले चित्रण कला मंच समिति और जय जगत एजुकेशन एण्ड वेलफेयर सोसायटी की ओर से प्रकाश बाल विद्या मंदिर इंटर कालेज गोमतीनगर में भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की युवा नृत्यांगना अंशिका के निर्देशन में चली लोकनृत्य कार्यशाला के लगभग 30 प्रतिभागियों ने भी बलराज साहनी मंच पर महारास का प्रदर्शन किया।
मंच पर कान्हा रे थोड़ा सा प्यार दे…., राधा गोरी गोरी…., मेरे घर राम आए हैं…. और जन्मे हैं कृष्ण कन्हैया…. जैसे गीतों पर वैष्णवी मिश्रा, रिद्धिमा यादव, अंजलि पाल, रिचा मिश्रा, रंगोली, शिवानी निर्मल, प्रिया मिश्रा, सृष्टि, रोशनी, तूलिका, तनिष्का, गौरी, साक्षी, अर्पिता, आयुषी, दिव्यांशी, प्रिया, प्रीतिका, प्रीति रावत, शिवानी, आरती, लक्ष्मी, सिद्धि यादव, दिव्यंका, शिवानी सिंह, खुशबू और सलोनी ने दर्शनीय नृत्य प्रदर्शन कर गीतों के बोलों को सार्थक किया। कार्यशाला की शुरुआत 20 मई से हुई थी।

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