गोरखपुर में 9 एसडीएम के तबादले के बाद नई तैनाती, डीएम ने अनुभव के आधार पर सौंपी जिम्मेदारियां

गोरखपुर में 9 एसडीएम के तबादले के बाद नई तैनाती, डीएम ने अनुभव के आधार पर सौंपी जिम्मेदारियां
ज्ञान प्रताप सिंह बने सदर एसडीएम, प्रशासनिक दक्षता और अनुभव पर जताया गया भरोसा
गोरखपुर। शासन द्वारा गोरखपुर जनपद के 9 उप जिलाधिकारियों के गैर जनपद तबादले के बाद जिले की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा फेरबदल किया गया है। अन्य जनपदों से आए उप जिलाधिकारियों को जिलाधिकारी दीपक मीणा ने उनके अनुभव और कार्यशैली के आधार पर नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इस क्रम में सदर तहसीलदार रहे ज्ञान प्रताप सिंह को सदर उप जिलाधिकारी (एसडीएम) का महत्वपूर्ण दायित्व दिया गया है, जो प्रशासनिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है।
इसके अलावा नमन मेहता को सहजनवा, मनीष कुमार को गोला, मलखान सिंह को बांसगांव, आनंद कटारिया को खजनी तथा रवि कुमार सिंह को चौरी-चौरा का एसडीएम बनाया गया है। सभी अधिकारियों को उनके पूर्व अनुभव और कार्यकुशलता के आधार पर तैनाती दी गई है, जिससे जिले में प्रशासनिक कार्यों की गति और प्रभावशीलता बनी रहे।
सदर एसडीएम बनाए गए ज्ञान प्रताप सिंह पर विशेष रूप से प्रशासन का भरोसा देखने को मिल रहा है। दरअसल, शासन ने 30 जून 2025 को उन्हें तहसीलदार से पदोन्नत कर उप जिलाधिकारी बनाया था और उनका तबादला अयोध्या जनपद में एसडीएम पद पर कर दिया गया था। हालांकि, उनके अनुभव और गोरखपुर में चल रही मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाओं को ध्यान में रखते हुए शासन ने उन्हें गोरखपुर में ही बनाए रखने का निर्णय लिया था।
गौरतलब है कि ज्ञान प्रताप सिंह जुलाई 2024 में गोरखपुर में तहसीलदार के पद पर तैनात हुए थे। प्रारंभिक दौर में उन्होंने कैम्पियरगंज तहसील का दायित्व संभाला और उसके बाद सदर तहसील का कार्यभार देखना शुरू किया। पिछले एक वर्ष से अधिक समय से वे सदर तहसील के तहसीलदार के रूप में कार्य कर रहे थे और इस दौरान उन्होंने राजस्व एवं विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया।
पदोन्नति के बाद भी उन्होंने सदर तहसील का दायित्व संभालते हुए अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया। उनके कार्यों में पारदर्शिता, समयबद्धता और जनसुनवाई में सक्रियता को लेकर उनकी विशेष पहचान बनी। यही कारण रहा कि जिलाधिकारी दीपक मीणा ने उनके अनुभव और दक्षता को देखते हुए उन्हें सदर एसडीएम जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी है।
ज्ञान प्रताप सिंह के नेतृत्व में जिले में चल रही कई अहम परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। इनमें विरासत गलियारा, गौड़-धोइया नाला, बांसस्थान मनीराम मार्ग असुरन पिपराइच मार्ग चौड़ीकरण सहित अन्य विकास कार्य शामिल हैं। इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, ज्ञान प्रताप सिंह की कार्यशैली जमीनी स्तर पर समस्याओं के त्वरित समाधान और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए जानी जाती है। वे आमजन की समस्याओं को गंभीरता से सुनने और उनका शीघ्र निस्तारण कराने के लिए भी पहचाने जाते हैं, जिससे आम लोगों में उनके प्रति सकारात्मक छवि बनी हुई है।
वहीं, जिले में अन्य उप जिलाधिकारियों की तैनाती भी प्रशासनिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए की गई है, ताकि सभी तहसीलों में विकास कार्य और कानून-व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके।
अब सभी की निगाहें सदर एसडीएम के रूप में ज्ञान प्रताप सिंह के कार्यकाल पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि वे अपने अनुभव और कार्यकुशलता के दम पर जिलाधिकारी दीपक मीणा की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतर पाते हैं और जिले के महत्वपूर्ण तहसील सदर के विकास कार्यों को किस गति से आगे बढ़ाते हैं।


