लखनऊ में 69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का घेराव: शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर हंगामा, पुलिस ने हिरासत में लेकर इको गार्डन भेजा

लखनऊ में 69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का घेराव: शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर हंगामा, पुलिस ने हिरासत में लेकर इको गार्डन भेजा

गंभीर आरोप: अभ्यर्थियों का दावा—पुलिस ने धक्का-मुक्की की और कपड़े फाड़े; प्रदर्शन के दौरान एक अभ्यर्थी बेहोश, महिला अभ्यर्थी का बच्चा पुलिसकर्मियों ने संभाला।
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध-प्रदर्शन एक बार फिर उग्र हो गया है। शुक्रवार सुबह करीब 11:10 बजे बड़ी संख्या में अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश के शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास पहुंचे और उनका घेराव किया।
प्रदर्शन के दौरान हंगामा और नोकझोंक
प्रदर्शन के दौरान करीब 60 अभ्यर्थी हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर पहुंचे थे, जिन पर पिछड़े और दलित वर्ग के साथ न्याय की मांग से जुड़े स्लोगन लिखे थे। अभ्यर्थियों ने “योगी बाबा न्याय करो” के नारे लगाए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया, तो दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। अभ्यर्थियों का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई के दौरान उनके कपड़े तक फट गए। करीब 30 मिनट तक चले हंगामे के बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और बसों में बैठाकर इको गार्डन भेज दिया।
बेहोश हुआ अभ्यर्थी, बच्चे को संभालते दिखे पुलिसकर्मी
प्रदर्शन के दौरान भारी तनाव के बीच एक अभ्यर्थी अचानक बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा। वहीं, एक महिला अभ्यर्थी अपने छोटे बच्चे के साथ प्रदर्शन में शामिल होने पहुंची थी, जिसकी स्थिति को देखते हुए पुलिसकर्मियों ने बच्चे को अपनी गोद में लेकर संभाला।
क्या है
अभ्यर्थियों की मुख्य मांग?
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मूल मांग 6,800 सीटों पर पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की थी। हालांकि, सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल नए हलफनामे के तहत अब केवल करीब 3,300 अभ्यर्थियों को ही नियुक्ति मिल सकेगी। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार की इस नई प्रक्रिया के कारण लगभग 4,946 ऐसे अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं जो पहले भी इस भर्ती प्रक्रिया से बाहर रहे हैं। अभ्यर्थियों ने सरकार पर उनकी मांगों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।



