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प्रीपेड मीटर के ‘शॉक’ से भड़की जनता: पार्षद ममता रावत के नेतृत्व में लौलई पावर हाउस पर जोरदार प्रदर्शन

प्रीपेड मीटर के ‘शॉक’ से भड़की जनता: पार्षद ममता रावत के नेतृत्व में लौलई पावर हाउस पर जोरदार प्रदर्शन

लखनऊ। राजधानी के चिनहट इलाके में मंगलवार को बिजली विभाग के खिलाफ जन-आक्रोश का ज्वालामुखी फूट पड़ा। काशीराम कॉलोनी में लगाए जा रहे प्रीपेड मीटरों और बिजली की बदहाली के विरोध में सैकड़ों निवासियों ने क्षेत्रीय पार्षद ममता रावत के नेतृत्व में लौलई विद्युत उपकेंद्र का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान जनता ने विभाग की कार्यप्रणाली और नए मीटरिंग सिस्टम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

​क्यों सड़कों पर उतरी काशीराम कॉलोनी की जनता?

​प्रदर्शनकारियों का मुख्य विरोध निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित रहा:

प्रीपेड मीटर का विरोध: निवासियों का आरोप है कि प्रीपेड मीटर लगने के बाद से बिलों में विसंगतियां बढ़ गई हैं और बिना सूचना के कनेक्शन कटने का डर बना रहता है। गरीब परिवारों के लिए यह व्यवस्था ‘मुसीबत’ बन गई है।

​लो-वोल्टेज की मार: भीषण गर्मी में वोल्टेज की लुका-छिपी ने घरों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शोपीस बना दिए हैं।

​अघोषित कटौती: घंटों बिजली गुल रहने के बावजूद स्मार्ट मीटर की ‘रफ़्तार’ थमती नहीं दिख रही है, जिससे लोग बेहाल हैं।

पार्षद ममता रावत का कड़ा रुख

​धरने पर बैठीं पार्षद ममता रावत ने विभाग को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “एक तरफ जनता भीषण गर्मी और बिजली संकट से जूझ रही है, दूसरी तरफ प्रीपेड मीटर थोपकर उनके ऊपर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। विभाग पहले बुनियादी ढांचा सुधारे और बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करे, जनता का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

​उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रीपेड मीटर की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और कटौती बंद नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे।

​अधिकारियों को मांगनी पड़ी मोहलत

​हंगामे की तीव्रता को देखते हुए विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और पार्षद के साथ वार्ता की। अधिकारियों ने माना कि तकनीकी स्तर पर सुधार की आवश्यकता है।

​”प्रीपेड मीटर और वोल्टेज से जुड़ी शिकायतों की जांच की जाएगी। हमने स्थानीय लोगों की आपत्तियों को दर्ज कर लिया है और उच्चाधिकारियों को इससे अवगत कराया जाएगा। जल्द ही व्यवस्था को पारदर्शी और सुगम बनाया जाएगा।” — संबंधित विद्युत अधिकारी

निष्कर्ष: चेतावनी के साथ खत्म हुआ धरना

​अधिकारियों के आश्वासन के बाद पार्षद ममता रावत ने प्रदर्शन स्थगित किया, लेकिन स्पष्ट कर दिया कि यह केवल ‘विराम’ है। यदि अगले कुछ दिनों में जमीनी स्तर पर सुधार नहीं दिखा, तो कॉलोनी निवासी बड़े आंदोलन के लिए विवश होंगे। फिलहाल क्षेत्र में भारी तनाव के बाद शांति बनी हुई है, लेकिन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल बरकरार हैं।

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