पत्रकार से उलझना पड़ा भारी, यात्री को छोड़ने वाली बस परिचालक ड्यूटी से रोकी गई

पत्रकार से उलझना पड़ा भारी, यात्री को छोड़ने वाली बस परिचालक ड्यूटी से रोकी गई
गोरखपुर. उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बस में यात्री को रास्ते में छोड़कर आगे बढ़ जाने और शिकायत करने पर संतोषजनक जवाब न देने के मामले में आखिरकार कार्रवाई हो गई। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए बस्ती डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक ने बस संख्या UP78 JT 4976 की चालक रोशनी को अग्रिम आदेश तक परिचालन कार्य से रोक दिया है। कार्रवाई के बाद परिवहन निगम में हड़कंप मचा है.
मामला शुक्रवार का है। आजमगढ़ से गोरखपुर जा रही बस्ती डिपो की उक्त बस बड़हलगंज पहुंची थी। आरोप है कि बस रुकने के दौरान एक यात्री कुछ सामान लेने के लिए सड़क पार गया, लेकिन उसके वापस लौटने से पहले ही चालक-परिचालक बस लेकर आगे रवाना हो गए। यात्री का सामान और जरूरी दस्तावेज बस में ही छूट गए। बस को आगे जाता देख यात्री ने दूसरे वाहन से उसका पीछा किया और करीब 30 किलोमीटर बाद बस को पकड़ सका, बस मिलने के बाद यात्री ने चालक-परिचालक से पूरे मामले पर आपत्ति जताई और शिकायत की। आरोप है कि शिकायत का उचित समाधान करने के बजाय उसके साथ दबंग अंदाज में बातचीत की गई। मामला तब और गंभीर हो गया जब यात्री ने इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से करने की बात कही। शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने परिवहन निगम के अधिकारियों से भी संपर्क करने का प्रयास किया।
###शिकायतकर्ता के पत्रकार होने के बाद मामला और चर्चा में आया
इस पूरे प्रकरण में शिकायतकर्ता का पेशे से पत्रकार होना भी खासा चर्चा में है। बताया गया कि पत्रकार होने के बावजूद उसने किसी दबाव या प्रभाव का इस्तेमाल करने के बजाय मामले की शिकायत परिवहन निगम के जिम्मेदार अधिकारियों से की। शिकायत सामने आने के बाद विभाग ने मामले को संज्ञान में लिया और अब संबंधित परिचालक को परिचालन कार्य से रोकने का आदेश जारी कर दिया है।
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, बस्ती डिपो की ओर से 21 अगस्त को जारी आदेश में कहा गया है कि 21 अगस्त को व्हाट्सएप के माध्यम से प्राप्त शिकायत के दृष्टिगत वाहन संख्या UP78 JT 4976 की चालक रोशनी को अग्रिम आदेश तक परिचालन कार्य से रोका जाता है। आदेश की प्रतिलिपि क्षेत्रीय प्रबंधक, उत्तर प्रदेश परिवहन निगम गोरखपुर को भी सूचना के लिए भेजी गई है, बस परिचालक को परिचालन कार्य से रोके जाने की कार्रवाई ने यह संदेश जरूर दिया है कि यात्रियों की शिकायतों को नजरअंदाज करना संबंधित कर्मचारियों पर भारी पड़ सकता है।



