गाजीपुर/बलिया : जब प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर ने कहा— ‘दुःख में पहुंचना सबसे बड़ा धर्म’, झाड़ी आश्रम से जुड़ा प्रेरक संस्मरण

जब प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर ने कहा— ‘दुःख में पहुंचना सबसे बड़ा धर्म’, झाड़ी आश्रम से जुड़ा प्रेरक संस्मरण
स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज आज भी सुनाते हैं पूर्व प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता और सादगी की यह यादगार घटना
गाजीपुर/बलिया। सिद्धपीठ श्री हथियाराम मठ की शाखा झाड़ी आश्रम (बलिया) से जुड़ा पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर का एक प्रेरक संस्मरण आज भी लोगों को भावुक कर देता है। जूना अखाड़ा के वरिष्ठ महामंडलेश्वर एवं सिद्धपीठ हथियाराम के पीठाधीश्वर स्वामी भवानीनंदन यति इस घटना का उल्लेख करते हुए उनकी संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को याद करते हैं।बताया जाता है कि मकर संक्रांति के अवसर पर झाड़ी आश्रम में बाबा मुरारनाथ जी की समाधि पर आयोजित खिचड़ी प्रसाद वितरण कार्यक्रम में स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित कर रहे थे। उसी दौरान अपने गृह जनपद आए तत्कालीन प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर, जिनका स्वामी जी से आत्मीय संबंध था, उनसे मिलने आश्रम पहुंचे।इसी बीच आश्रम में उन्हें अपने एक निकटस्थ बालसखा के निधन का दुःखद समाचार मिला। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद उन्होंने अपने सचिव से तत्काल शोकाकुल परिवार के घर चलने की बात कही। अधिकारियों ने मौसम खराब होने का हवाला देते हुए हेलीकॉप्टर की उड़ान में असमर्थता जताई।इस पर चन्द्रशेखर ने अधिकारियों से कहा, “यदि देश पर कोई आपदा आ जाए तो क्या तब भी यही कहेंगे कि मौसम खराब होने के कारण उड़ान नहीं हो सकती?” उनके इस दृढ़ संकल्प के बाद तुरंत व्यवस्था की गई और वे अपने मित्र के घर पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त करने गए।यह संस्मरण पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर के व्यक्तित्व की उस मानवीय संवेदना को दर्शाता है, जिसमें उन्होंने पद और प्रोटोकॉल से ऊपर उठकर रिश्तों और मानवीय कर्तव्य को महत्व दिया। स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज आज भी इस घटना का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि किसी के सुख में पहुंचना अलग बात है, लेकिन किसी के दुःख में पहुंचने की व्याकुलता ही एक सच्चे जननेता की पहचान होती है।पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर की पुण्यतिथि पर ऐसे विलक्षण, संवेदनशील और जननायक राजनेता को विनम्र श्रद्धांजलि।



