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छत्तीसगढ़ : स्वरोजगार की राह पर ज्योति पाल

स्वरोजगार की राह पर ज्योति पाल

निर्माण कार्य से जुड़कर बनीं सफल उद्यमी

शैलेंद्र कुमार द्विवेदी
इंडिया नाऊ २४
छत्तीसगढ़

बलरामपुर,7 मार्च 2026/ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को समूहों के माध्यम से सशक्त बनाना तथा बेहतर आजीविका के अवसरों से जोड़ना है। इसी कड़ी में जिले के बलरामपुर जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत धनगांव के दामोदरपुर ग्राम में दीप स्व सहायता समूह का गठन किया गया, जिसकी सदस्य ज्योति पाल ने निर्माण कार्य से जुड़कर आजीविका गतिविधि से अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ की है। समूह में कुल 11 महिला सदस्यों को जोड़ा गया। समूह की नियमित बैठक, बचत, आंतरिक ऋण एवं बैंक से लिंकेज की प्रक्रिया राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के मानकों के अनुरूप की गई। इसी समूह की सदस्य ज्योति पाल ने समूह के माध्यम से मिले सहयोग और मार्गदर्शन से अपनी आजीविका गतिविधि को आगे बढ़ाया।

ज्योति बताती है कि प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत ग्राम एवं आसपास के क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना बड़ी संख्या में मकानों का निर्माण कार्य होना था। निर्माण कार्य के लिए सेंटिंग प्लेट की बढ़ती मांग को ज्योति पाल ने एक संभावित व्यावसायिक अवसर के रूप में पहचाना। निर्माण क्षेत्र से जुड़कर स्थायी आय का स्रोत विकसित करने के उद्देश्य से उन्होंने समूह के माध्यम से संसाधन जुटाने की योजना बनाई। उन्होंने सामुदायिक कोष, बैंक लिंकेज एवं स्वयं की राशि सेंट्रिंग प्लेट व्यवसाय प्रारंभ करने हेतु समूह को प्राप्त सामुदायिक कोष से 15,000 रुपये का ऋण, समूह के बैंक लिंकेज के माध्यम से 40,000 रुपये का अतिरिक्त ऋण एवम स्वयं की व्यक्तिगत बचत से 20,000 रुपये की राशि से सेटिंग प्लेट खरीदी। वे बताती है कि 75,000 रुपये का निवेश कर उन्होंने 30 सेट सेंटिंग प्लेट खरीदे। जिसका उपयोग मकान निर्माण में छत ढलाई के लिए किया जाने लगा। उन्होंने दामोदरपुर एवं आसपास के गाँव में ग्रामीण 05 मकानो के लिए प्लेट उपलब्ध कराने के साथ ही बलरामपुर नगर पंचायत क्षेत्र में चल रहे मकान निर्माण कार्यों के लिए 03 मकानों के लिए प्लेट किराये पर दिया है। इन सभी कार्यों से लगभग 1,45,000 रुपये की आय प्राप्त हुई। वे कहती है कि प्रारंभिक निवेश 75,000 रुपये को समायोजित करने के बाद भी अच्छा लाभ प्राप्त हुआ। उन्होंने सेंट्रिंग प्लेट व्यवसाय के साथ-साथ घर पर ही किराना दुकान भी संचालित की जा रही है। किराना दुकान से दैनिक आवश्यकता की वस्तुएँ ग्रामीणों को उपलब्ध कराती हैं।वे बताती है कि सेंट्रिंग प्लेट और किराना दुकान से उनकी वार्षिक आय लगभग 2 लाख रुपये से अधिक हो रही है। जिससे बेहतर आय के साथ आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।

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