टायर, इंजन ऑयल पहले से ही महंगे, अब 10-15 फीसदी बढ़ेगा परिवहन भाड़ा, इस दिन से होगा लागू; कारोबारी परेशान

टायर, इंजन ऑयल पहले से ही महंगे, अब 10-15 फीसदी बढ़ेगा परिवहन भाड़ा, इस दिन से होगा लागू; कारोबारी परेशान
चार साल बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। लखनऊ में पेट्रोल करीब तीन रुपये महंगा होकर 97.55 रुपये और डीजल 90.82 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया। बिना पूर्व सूचना बढ़े दामों से वाहन चालकों और रोजाना सफर करने वाले कामगारों में नाराजगी देखी गई।
पेट्रोल डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी के साथ ही अब परिवहन भाड़ा भी 10-15 प्रतिशत बढ़ेगा। ट्रांसपोर्टरों ने सोमवार से बढ़े हुए भाड़े को लागू करने का निश्चय किया है। उधर, इंजन ऑयल और टायरों के दामों में 20-25 फीसदी की महंगाई पहले से ही है।
इससे माल परिवहन कारोबार से जुड़े कारोबारी पहले से ही परेशान हैं। क्योंकि उनकी लागत बढ़ती जा रही थी। अभी तक माल परिवहन भाड़ा नहीं बढ़ा था लेकिन सोमवार से इसमें भी इजाफा होगा जिससे बाजार में सीधे तौर पर महंगाई और बढ़ेगी।
भोजन की थाली 20 फीसदी महंगी
व्यावसायिक सिलिंडर की डेढ़ गुना कीमतों ने भोजन की थाली 20 फीसदी पहले ही महंगी कर दी हैं। अब परिवहन भाड़ा महंगा होने से बाजार महंगाई के मुहाने पर खड़ा है। क्योंकि, परिवहन भाड़े से कमोबेश हर उत्पाद सीधे तौर पर प्रभावित होगा। परिवहन व ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़े कारोबारी बताते हैं कि इसके पीछे पूरे क्रूड ऑयल सिस्टम का असर है।
क्योंकि पिछले दो महीनों में इंजिन ऑयल से लेकर टायर तक में 20-25 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। इससे हमारी इनपुट लागत तो बढ़ी थी पर आउटपुट नहीं मिल रहा था। अब पेट्रोल डीजल के बढ़े दामों से भाड़ा बढ़ाने पर मजबूर हैं। कारोबारी बताते हैं कि जीएसटी में जो छूट मिली थी हम सात महीने बाद फिर से वहीं पर पहुंच गए हैं।
अनुबंध शर्तों पर ही होगा काम
ट्रांसपोर्टनगर के कारोबारी टीपीएस अनेजा ने बताया कि लखनऊ से जो भी बुकिंग की जाती है उसमें सोमवार से बढ़ी दरें 7 प्रतिशत लागू होंगी। सामान्य रूप से हमारे अनुबंध में यह लिखा रहता है कि पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने से भाड़े को रिवाइज किया जाएगा। ऐसे में जिन्होंने क्लाइंट के साथ पहले से करार किया है उन्हें तो भाड़ा बढ़ाने का अधिकार है। लेकिन, जिन क्लाइंटों से इस तरह का कोई करार नहीं हुआ है, उन्हें पुरानी दरों पर ही माल भेजना होगा। ऐसे में ट्रांसपोर्टरों का काफी घाटा होगा।


