पूर्व सांसदों को तीन-तीन पेंशन और कर्मचारियों को बुढ़ापे

पूर्व सांसदों को तीन-तीन पेंशन और कर्मचारियों को बुढ़ापे की सुरक्षा से वंचित करना सामाजिक न्याय के विरुद्ध: रूपेश
*अरबपति सांसद/विधायक, अधिकारी/कर्मचारी की बंद हो पेंशन*: मदन मुरारी शुक्ल
गोरखपुर । अमर उजाला में प्रकाशित समाचार “खरबों की संपत्ति के मालिक पूर्व सांसद भी ले रहे पेंशन” ने देश की पेंशन व्यवस्था में व्याप्त असमानता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। समाचार के अनुसार पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों एवं पूर्व मुख्यमंत्रियों को विभिन्न प्रकार की पेंशन एवं सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं, जबकि 30–35 वर्ष तक सरकारी सेवा करने वाले लाखों कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना से वंचित कर राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के भरोसे छोड़ दिया गया है। इस संबंध में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की एक आवश्यक बैठक परिषद के कैद कार्यालय तुर्कमानपुर में संपन्न हुई जिसकी अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष रूपेश कुमार श्रीवास्तव और संचालन महामंत्री मदन मुरारी शुक्ल ने किया।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, गोरखपुर के अध्यक्ष रूपेश कुमार श्रीवास्तव एवं महामंत्री मदन मुरारी शुक्ल ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को सम्मानजनक पेंशन और सुविधाएं मिलना गलत नहीं है, लेकिन उसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जीवन के 30–35 वर्ष सरकार और जनता की सेवा करने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित एवं सम्मानजनक पेंशन से वंचित रखना निश्चित रूप से विचारणीय विषय है।
उन्होंने कहा कि समाचार में सामने आया यह तथ्य कि कुछ पूर्व जनप्रतिनिधियों को तीन–तीन पेंशन का लाभ मिल रहा है, जबकि कर्मचारी अपनी पूरी नौकरी के बाद भी निश्चित पेंशन के लिए संघर्ष कर रहा है, देश की पेंशन व्यवस्था में व्याप्त असमानता को उजागर करता है। रूपेश श्रीवास्तव ने कहा कि पेंशन से देश की अर्थव्यवस्था पर अधिकार नहीं पड़ेगा बल्कि पूंजीपतियों का लाखों करोड कर्ज माफ करने से देश की अर्थव्यवस्था खराब हो रही है। उन्होंने कहा कि पेंशन कर्मचारियों का संवैधानिक अधिकार है अगर इसे नहीं दिया गया तो भविष्य में देश के करोड़ों कर्मचारी एक बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे।
परिषद के नेताओं ने कहा कि पेंशन कोई खैरात नहीं, बल्कि कर्मचारी की वर्षों की सेवा का सामाजिक सुरक्षा अधिकार है। कर्मचारी अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय सरकार और समाज की सेवा में लगाता है। सेवानिवृत्ति के बाद उसके सामने परिवार, स्वास्थ्य, दवा और रोजमर्रा के खर्च की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में बाजार आधारित एवं अनिश्चित पेंशन व्यवस्था के भरोसे कर्मचारी का भविष्य छोड़ना न्यायसंगत नहीं है।
परिषद ने केंद्र एवं राज्य सरकार से मांग की कि NPS को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) तत्काल बहाल की जाए, ताकि सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित, सम्मानजनक एवं सुरक्षित पेंशन मिल सके।
*अध्यक्ष रूपेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा*—
*जब देश अपने जनप्रतिनिधियों को जीवनभर सामाजिक सुरक्षा दे सकता है, तो देश की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले कर्मचारियों को बुढ़ापे की निश्चित सुरक्षा देने में सरकार को संकोच क्यों होना चाहिए? कर्मचारी और जनप्रतिनिधि दोनों लोकतंत्र के महत्वपूर्ण अंग हैं, इसलिए पेंशन व्यवस्था में भेदभाव नहीं, बल्कि न्याय और समानता का भाव होना चाहिए।*
उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन की बहाली केवल कर्मचारियों की मांग नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा, सम्मान और न्याय से जुड़ा प्रश्न है। सरकार को कर्मचारियों की भावनाओं को समझते हुए शीघ्र निर्णय लेना चाहिए।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, गोरखपुर ने स्पष्ट किया कि पुरानी पेंशन की बहाली के लिए चल रहे लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक आंदोलनों को परिषद का समर्थन जारी रहेगा और कर्मचारियों के सुरक्षित भविष्य के लिए हर स्तर पर आवाज उठाई जाएगी।
इस अवसर पर रूपेश कुमार श्रीवास्तव अशोक पांडे मदन मुरारी शुक्ला पंडित श्याम नारायण शुक्ला अनिल द्विवेदी राजेश मिश्रा अनूप कुमार सौरभ श्रीवास्तव नरेंद्र धर द्विवेदी राहुल श्रीवास्तव इजहार अली रामधनी पासवान आदि लोग उपस्थित रहे।


