जब पटीदारों में नहीं पटती, तो सबसे ज्यादा खुश कौन होता है?

जब पटीदारों में नहीं पटती, तो सबसे ज्यादा खुश कौन होता है?
विचार / लेख
कहावत है, घर का झगड़ा बाहर वालों के लिए तमाशा होता है।
जब किसी परिवार में पटीदार आपस में नहीं पटते और अलग-थलग होते हैं, तो इसका सबसे ज्यादा दुख अपनों को ही होता है। वहीं कुछ ऐसे रिश्तेदार भी होते हैं, जिन्हें इस फूट से कोई तकलीफ नहीं, बल्कि खुशी होती है।
जिन रिश्तेदारों को अपने लोगों से लालच नहीं होता, वही सच्चे शुभचिंतक होते हैं और वही दुखी भी होते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनका मकसद ही लड़ाकर अपना उल्लू सीधा करना होता है। ऐसे लोग आग में घी डालने का काम करते हैं और कभी नहीं चाहते कि पटीदार एक रहें।
इसलिए यह समझना जरूरी है कि अगर पटीदार एकजुट रहेंगे, तभी वे गाँव-मोहल्ले में किसी की मदद कर पाएंगे। जब अपने ही एक नहीं रहेंगे, तो दूसरों की मदद क्या करेंगे?
एकता में ही ताकत है।


