डॉ आरएमडी : भारी पड़ गई सिक्स लेन पर की गई टिप्पणी?

डॉ आरएमडी : भारी पड़ गई सिक्स लेन पर की गई टिप्पणी?
👉भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में गोरखपुर के चार बार के पूर्व विधायक और वर्तमान में गोरखपुर से राज्यसभा सांसद एवं निवर्तमान राष्ट्रीय कार्यकारिणी के राष्ट्रीय महासचिव डॉक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल को समिति में स्थान नहीं मिला। जबकि महासचिव के रूप में भाजपा की महिला नेत्री स्मृति ईरानी को स्थान मिला और राम माधव को भी महासचिव के रूप में तैनाती मिली.हरीश द्विवेदी जो मंत्री थे उन्हें महासचिव के रूप में स्थान दिया गया. ऐसी स्थिति में यह बहुत ही चौंकाने वाला निर्णय रहा और इसके राजनीतिक गलियारे में बहुत सारे निहितार्थ निकाले जा रहे हैं. माना जा रहा है कि डॉक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल एक तेज तर्रार प्रखर वक्ता और कुशल राजनेता के रूप में अपनी छवि बनाए हुए हैं। पेशे से बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अग्रवाल ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी की थी। प्रारंभ में आप पूर्व प्रधानमंत्री श्री चंद्रशेखर सिंह के काफी समीप रहे, बाद में अपने गोरक्षनाथ पीठ के राजनीतिक परिदृश्य को अपनाते हुए ब्राह्मलीन महंत अवैद्यनाथ जी महाराज के साथ अपनी पहचान बनाई और उनके लोकसभा चुनाव का कुशलता से संचालन किया।कालांतर में मंदिर से तत्कालीन विधायक शिव प्रताप शुक्ला की दूरियां बढ़ने के बाद आप योगी आदित्यनाथ के करीबी के रूप में सदर विधानसभा से निर्दलीय चुनाव जीते और बाद में भाजपा के विधायक बनते चले गए। लेकिन समय हमेशा एक समान नहीं होता है और ऐसे में ही विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल की दूरियां मंदिर से कम, योगी आदित्यनाथ से तेजी से बिगड़ती गई। लेकिन बड़े महंत के आशीर्वाद और सफलता के रथ पर सवार डॉक्टर अग्रवाल यह मान कर चलते थे कि गोरखपुर में उनकी निष्कलंक छवि और उनके द्वारा कराए गए काम अब किसी के सर परस्ती के मोहताज नहीं है और शायद यही डॉक्टर अग्रवाल चूक गए। 2017 में जब सबको यह उम्मीद थी कि डॉक्टर अग्रवाल प्रमुख रूप से कैबिनेट मंत्री बनेंगे,अचानक उत्तर प्रदेश के प्रदेश में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बनकर सामने आ गए और डॉक्टर अग्रवाल की महत्वाकांक्षा अचानक दम तोड़ती नजर आई.अगले टर्म में डॉक्टर अग्रवाल को गोरखपुर से टिकट नहीं मिला और उन्हें राज्यसभा भेजा दिया गया। साथही उत्तर प्रदेश की पूरी राजनीति से अलग उन्हें राष्ट्रीय महासचिव के रूप में स्थापित करते हुए विभिन्न राज्यों का प्रभार भी सोपा गया। ऐसा लगा कि डॉक्टर राधा मोहन दास एक बारगी काफी ताकतवर होकर फिर गोरखपुर या उत्तर प्रदेश की राजनीति में लौटेंगे, लेकिन इसी बीच डॉक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल के घर के ठीक सामने गोरखपुर में बने पहले सिक्स लेन फ्लाईओवर के उद्घाटन के दौरान डॉक्टर राधा मोहन दास को घर में रहते हुए भी ना बुलाया जाना उन्हें नागवार गुजरा और इसका आक्रोश प्रदर्शन उन्होंने सोशल मीडिया पर कर दिया और शायद यही वह चूक गए. इसके पहले भी एक हत्या के मामले में डॉक्टर अग्रवाल ने मुखरित होकर कुछ ऐसी बातें सोशल मीडिया में बयान पर दी थी जो इशारा करती थी कि वह जल्द ही बड़ा खुलासा करेंगे और इसमें बड़े लोगों को नंगा करेंगे। अपने संबोधन में दो-तीन बार उनके द्वारा गोरखनाथ मंदिर का नाम लिया जाना लोगों को काफी चौका गया था. योगी जी को एक आधार मिला और माना जा सकता है कि योगी आदित्यनाथ ने इसको गंभीरता से लेते हुए उनके विरुद्ध दिल्ली में आवाज बुलंद की,जिसका परिणाम इस प्रकार उनका नाम कमेटी से बाहर के रूप में नजर आ रहा है.
प्रश्न है कि अब डॉक्टर राधा मोहन दास का भविष्य क्या है?मानने वाले यह भी मानते हैं कि डॉक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल कुशाग्र बुद्धी के राजनीतिज्ञ हैं और वह किसी भी परिस्थिति में हथियार डालने वाले योद्धा नजर नहीं आते हैं. ऐसे में राजनीतिक गलियारे में चर्चा यह भी है कि केंद्र में योगी आदित्यनाथ का जो विरोधी खेमा है उसको सहेजते हुए शीघ्र ही राधा मोहन दास अग्रवाल भाजपा में राज्यपाल सरिखे किसी शीर्ष पद पर या मंत्रिमंडल में भी शामिल होते हुए दिखाएं दे सकते हैं. लेकिन फिलहाल यह उनके राजनीतिक कैरियर का एक अहम बिंदु है जहां से वे या तो ऊंची छलांग लगा सकते हैं और या फिर एकदम राजनीति के हाशिये पर जा सकते हैं. आने वाला कुछ समय उनके लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगा.



