लखनऊ: महापौर और भाजपा पार्षदों में बढ़ी रार, संगठन तक पहुंची अनुशासनहीनता की शिकायत

लखनऊ: महापौर और भाजपा पार्षदों में बढ़ी रार, संगठन तक पहुंची अनुशासनहीनता की शिकायत
लखनऊ नगर निगम में महापौर सुषमा खर्कवाल और भाजपा पार्षदों के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब गंभीर मोड़ ले चुका है। अवस्थापना निधि के आवंटन और भेदभाव के आरोपों के बीच मामला भाजपा संगठन तक पहुंच गया है, जहां कुछ पार्षदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।
विवाद की वजह: पार्षदों का आरोप है कि महापौर अवस्थापना निधि के आवंटन में पक्षपात कर रही हैं और केवल अपने नजदीकी पार्षदों के वार्डों में ही काम करा रही हैं।
निधि का गणित: विरोधी गुट का दावा है कि सांसद राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र के 88 वार्डों के लिए महज ₹18 करोड़ मिले हैं, जबकि सपा सांसद आर.के. चौधरी के मोहनलालगंज क्षेत्र के 22 वार्डों के लिए ₹32 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।
संगठन को पत्र: 80 भाजपा पार्षदों के दो गुटों में बटने के बाद, विरोध करने वाले पार्षदों पर अनुशासनहीनता और पार्टी-महापौर को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए बंद लिफाफे में महानगर अध्यक्ष को पत्र भेजा गया है।
निशाने पर कई नेता: महापौर के निशाने पर पार्षद दल के उपनेता देव शर्मा, मुन्ना मिश्रा, मुख्य सचेतक मुकेश सिंह ‘मोटी’, सचेतक अमित चौधरी, रंजना अवस्थी, मालती यादव, कौशलेंद्र द्विवेदी, प्रतिभा तिवारी, शैलेंद्र वर्मा, राजेश सिंह ‘गब्बर’ और नामित पार्षद अखिलेश गिरि समेत अन्य नेता हैं।
पत्र और बयानों में विरोधाभास
पत्र में दावा किया गया है कि बीते तीन वर्षों में पार्षद निधि को ₹1.50 करोड़ से बढ़ाकर ₹2.10 करोड़ किया गया है और सभी वार्डों में समान रूप से विकास कार्य कराए गए हैं। हालांकि, पत्र की सत्यता पर खुद नेताओं के बयानों में अंतर देखा जा रहा है:
महापौर सुषमा खर्कवाल: उनका कहना है कि उन्होंने संगठन को ऐसा कोई पत्र नहीं भेजा है और उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
सुशील तिवारी ‘पम्मी’ (उपाध्यक्ष, नगर निगम कार्यकारिणी): उनका दावा है कि उन्होंने महापौर के पत्रवाहक के रूप में गुरुवार को महानगर भाजपा अध्यक्ष आनंद द्विवेदी को पत्र सौंपा था।
आनंद द्विवेदी (महानगर भाजपा अध्यक्ष): उन्होंने पुष्टि की कि पार्षद सुशील तिवारी बंद लिफाफा दे गए थे, लेकिन उन्होंने अभी तक उसे खोलकर पढ़ा नहीं है।



