युवाओं में गूंजे देशभक्ति के स्वर, लोकनृत्यों ने जीवंत की लोक संस्कृति

युवाओं में गूंजे देशभक्ति के स्वर, लोकनृत्यों ने जीवंत की लोक संस्कृति
गोरखपुर ।आज दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 45वें दीक्षांत समारोह के अंतर्गत आयोजित दीक्षोत्सव में बुधवार को तरंग सांस्कृतिक प्रकोष्ठ की ओर से देशभक्ति गीत एवं लोकनृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के लगभग 75 प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियों से देशभक्ति और भारतीय लोक संस्कृति की मनमोहक छटा बिखेरी।
कार्यक्रम का शुभारंभ ललित कला एवं संगीत की विभागाध्यक्ष एवं तरंग सांस्कृतिक प्रकोष्ठ की निदेशक प्रो. अनुभूति दुबे ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ उनकी रचनात्मक प्रतिभा, आत्मविश्वास और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का कार्य करते हैं। मंच विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा निखारने और राष्ट्र व संस्कृति से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।
शोधार्थी राजन के संचालन में देशभक्ति गीत प्रतियोगिता का शुभारंभ दिव्यांका दुबे की प्रस्तुति ‘ऐ मेरे वतन के लोगों, ज़रा आँख में भर लो पानी’ से हुआ। गीत समाप्त होते ही पूरा सभागार ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा। इसके बाद सुहाना वर्मा ने ‘मेरा कर्मा तू, मेरा धर्मा तू’ प्रस्तुत कर श्रोताओं को झूमने पर विवश कर दिया। लगभग 20 प्रतिभागियों ने विभिन्न देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति देकर युवाओं में राष्ट्रप्रेम का भाव जागृत किया।
इसके बाद लोकनृत्य प्रतियोगिता में अंशिका राणा एवं अनुप्रिया शर्मा ने पारंपरिक लोकगीत ‘पिया मेहंदी मंगा द मोतीझील से, जा के साइकिल से’ पर आकर्षक प्रस्तुति दी। वहीं शाश्वत तिवारी, अंतरा चौधरी एवं अमृता मिश्रा ने राजस्थान की लोकसंस्कृति को मंच पर साकार करते हुए ‘घूमर’, ‘चौमासा’, ‘रंगीलो म्हारो’ तथा ‘नगाड़े संग ढोल बाजे’ जैसे गीतों पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को लोक संस्कृति के रंग में सराबोर कर दिया।
देशभक्ति गीत प्रतियोगिता के संयोजक डॉ. शैलेश सिंह तथा सह संयोजक डॉ. पूजा सिंह रहे। लोकनृत्य प्रतियोगिता के संयोजक डॉ. प्रदीप साहनी एवं सह संयोजक डॉ. कृतिका श्रीवास्तव ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
देशभक्ति गीत प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल – डा. जयराम पंचम प्रकाश मलिक, डा. इन्द्रेश कुमार सहाय, डा. रामकिशोर शर्मा और लोक नृत्य में निर्णायक मण्डल के रूप में डा.कृतिका श्रीवास्तव व प्रेम नाथ ने किया।
प्रतियोगिता के डा. नेहर्षि सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।



