गुरुग्राम : वर्ल्ड पार्किंसन डे 2026: आर्टेमिस हॉस्पिटल्स और क्रेस्ट न्यूरो सर्विसेज की जागरूकता पहल, समय पर पहचान और समग्र इलाज पर जोर

रिपोर्टर इंडिया नाउ 24 सुरेंद्र गुरुग्राम
वर्ल्ड पार्किंसन डे 2026: आर्टेमिस हॉस्पिटल्स और क्रेस्ट न्यूरो सर्विसेज की जागरूकता पहल, समय पर पहचान और समग्र इलाज पर जोर

गुरुग्राम, 8 अप्रैल 2026: वर्ल्ड पार्किंसन डे के अवसर पर आर्टेमिस हॉस्पिटल्स ने क्रेस्ट न्यूरो सर्विसेज के साथ मिलकर सेक्टर 51 स्थित अपने कैंपस में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। #BridgeTheCareGap थीम के तहत आयोजित इस पहल में विशेषज्ञों ने पार्किंसन रोग की शुरुआती पहचान, आधुनिक उपचार और समग्र देखभाल की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में देश के प्रमुख न्यूरोलॉजिस्ट्स ने भाग लिया, जिनमें डॉ. सुमित सिंह, (चीफ – न्यूरोलॉजी एवं को-चीफ, स्ट्रोक यूनिट), डॉ. आदित्य गुप्ता, (चीफ – न्यूरोसर्जरी एवं सीएनएस रेडियोसर्जरी एवं को-चीफ, साइबरनाइफ सेंटर) और डॉ. मोहित आनंद (कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट एवं मूवमेंट डिसऑर्डर्स स्पेशलिस्ट) शामिल रहे। विशेषज्ञों ने बताया कि पार्किंसन रोग के शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के होते हैं, जिससे इसकी पहचान देर से होती है।
डॉ. सुमित सिंह ने कहा, “अगर समय पर पहचान और नियमित जांच हो, तो मरीजों की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है और बीमारी की प्रगति को धीमा किया जा सकता है। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना अक्सर देरी का कारण बनता है, जबकि सही समय पर हस्तक्षेप से उपचार अधिक प्रभावी हो जाता है। जागरूकता और नियमित स्क्रीनिंग के जरिए मरीज लंबे समय तक सक्रिय और स्वतंत्र जीवन जी सकते हैं। साथ ही, समय पर इलाज से जटिलताओं के जोखिम को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।”
डॉ. आदित्य गुप्ता ने उपचार में नई तकनीकों पर जोर देते हुए कहा, “डीप ब्रेन स्टिमुलेशन जैसी आधुनिक सर्जिकल तकनीकों से आज मरीजों को पहले से बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। इन उन्नत प्रक्रियाओं से कंपकंपी, जकड़न और अनियंत्रित मूवमेंट जैसे लक्षणों को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। सही मरीज चयन और दवाओं के साथ इन तकनीकों के संयोजन से उपचार के परिणाम और भी बेहतर हो जाते हैं। इससे न सिर्फ मरीजों की दैनिक गतिविधियों में सुधार आता है, बल्कि उनकी स्वतंत्रता और आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
वहीं, डॉ. मोहित आनंद ने समग्र देखभाल की जरूरत बताते हुए कहा, “पार्किंसन का इलाज केवल दवाओं तक सीमित नहीं है। इसमें फिजियोथेरेपी, मानसिक स्वास्थ्य सहयोग और जीवनशैली में जरूरी बदलाव अहम भूमिका निभाते हैं। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और भावनात्मक समर्थन से मरीजों की कार्यक्षमता और आत्मनिर्भरता बनी रहती है। एक समग्र और मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण ही उन्हें बेहतर जीवन गुणवत्ता और सम्मान के साथ जीने में मदद करता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि पार्किंसन के सामान्य लक्षणों में कंपकंपी, शरीर की गति धीमी होना, बोलने में दिक्कत, जकड़न और सूंघने की क्षमता में कमी शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेने की सलाह दी गई।
इस पहल के जरिए आर्टेमिस हॉस्पिटल्स और क्रेस्ट न्यूरो सर्विसेज ने पार्किंसन रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने और बेहतर न्यूरोलॉजिकल केयर प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम का समापन प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें मीडिया और विशेषज्ञों के बीच सार्थक संवाद देखने को मिला।



