जखनिया (गाजीपुर) : कोतवाल के खिलाफ चौहान समाज का जोरदार प्रदर्शन,काफ़ी बहसा बहसी के बाद तीन सूत्रीय मांगों को लेकर तहसील में सौंपा ज्ञापन

कोतवाल के खिलाफ चौहान समाज का जोरदार प्रदर्शन,काफ़ी बहसा बहसी के बाद तीन सूत्रीय मांगों को लेकर तहसील में सौंपा ज्ञापन

जखनिया (गाजीपुर)। भुड़कुंडा कोतवाली के एक दरोगा और चौहान समाज के नेता पवन चौहान के बीच हुए विवाद का मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा में है। इसी प्रकरण को लेकर चौहान समाज के लोगों ने पहले ही कोतवाली घेराव की चेतावनी दी थी। चेतावनी के मद्देनजर गुरुवार को जखनिया तहसील परिसर और भुड़कुंडा कोतवाली क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
गुरुवार की सुबह लगभग 11 बजे जखनिया बाजार और आसपास के क्षेत्रों से चौहान समाज के नेता और समर्थक जुटने लगे। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन आधा दर्जन थानों की पुलिस, थाना अध्यक्षों के साथ पीएसी बल भी तैनात कर दिया।
करीब 11:30 बजे चौहान समाज के नेता पवन चौहान लगभग डेढ़ सौ महिला-पुरुषों के साथ जखनिया रेलवे स्टेशन के पीछे से जुलूस की शक्ल में निकले। प्रदर्शनकारी कोतवाल मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए चौजा तिराहा होते हुए जखनिया ब्लॉक मार्ग से तहसील गेट तक पहुंचे। इस दौरान वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों से प्रदर्शनकारियों की हल्की नोकझोंक भी हुई।
काफी बहस के बाद प्रदर्शनकारियों को तहसील परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल पवन चौहान ने उप जिलाधिकारी अतुल कुमार को पुलिस अधीक्षक गाजीपुर के नाम संबोधित तीन सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में भुड़कुंडा कोतवाल को तत्काल हटाने और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करने, कुछ लोगों से थानाध्यक्ष द्वारा जब्त किए गए मोबाइल, रुपये, मोटरसाइकिल और चार पहिया वाहन वापस कराने तथा 3 मार्च 2026 की घटना के दौरान थाने के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की गई।
मीडिया से बातचीत में जनवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व शब्दबेदी चौहान समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन चौहान ने कहा कि भुड़कुंडा कोतवाल का रवैया आम जनता के प्रति ठीक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा कुछ लोगों को पकड़कर थाने लाया गया था, जब वे उन्हें छुड़ाने के लिए पहुंचे तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्यप्रणाली पारदर्शी होनी चाहिए।
वहीं भुड़कुंडा कोतवाल श्यामजी यादव ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिन लोगों को छुड़ाने का दबाव बनाया जा रहा था, वे कहीं न कहीं आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त थे और उनके खिलाफ पहले से भी कई मामले दर्ज हैं।
इस दौरान सरोज समाजसेवी (आजमगढ़), रामरतन दिव्यांग, राजू दिव्यांग, पूजन दिव्यांग, अंगद दिव्यांग, ओमप्रकाश, विनोद (जिला अध्यक्ष आजमगढ़), पूनम, सुमित्रा देवी, कांति, मोनू यादव, प्रियांशु यादव सहित लगभग डेढ़ सौ लोग मौजूद रहे।



