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लखनऊ/कुलपहाड़ : भीषण गर्मी में आयुर्वेद बनेगा आपका सुरक्षा कवच: डॉ. सौरभ खरे के विशेष स्वास्थ्य सुझाव

भीषण गर्मी में आयुर्वेद बनेगा आपका सुरक्षा कवच: डॉ. सौरभ खरे के विशेष स्वास्थ्य सुझाव

लखनऊ/कुलपहाड़। लगातार बढ़ता पारा और चिलचिलाती धूप न केवल हमारी ऊर्जा सोख रही है, बल्कि पाचन तंत्र पर भी गहरा असर डाल रही है। आयुर्वेद के अनुसार, गर्मी के इस मौसम में शरीर के तापमान को संतुलित रखना ही स्वस्थ रहने की पहली शर्त है। सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. सौरभ खरे ने इस भीषण गर्मी से बचने और शरीर को अंदर से ठंडा रखने के लिए आयुर्वेद आधारित महत्वपूर्ण गाइडलाइंस साझा की हैं।

1. खान-पान: पाचन शक्ति का रखें खास ख्याल

जैसे-जैसे बाहर की गर्मी बढ़ती है, हमारे शरीर की ‘जठराग्नि’ (पाचन शक्ति) मंद पड़ जाती है। इसलिए इस मौसम में खान-पान का चुनाव बहुत सोच-समझकर करना चाहिए:

हल्का और सुपाच्य भोजन: गरिष्ठ, तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार भोजन से परहेज करें। यह न केवल अपच पैदा करता है बल्कि शरीर की आंतरिक गर्मी को भी बढ़ाता है।

मौसमी फल व सब्जियां: प्रकृति के उपहारों जैसे—तरबूज, खीरा, ककड़ी, लौकी और तरोई को प्राथमिकता दें। इनकी तासीर ठंडी होती है और ये जल की कमी को पूरा करते हैं।

आम और अदरक का संतुलन: डॉ. खरे के अनुसार, केवल ठंडी चीजें खाने से पाचन सुस्त हो सकता है। जठराग्नि को सक्रिय रखने के लिए सीमित मात्रा में आम और अदरक का सेवन भी जरूरी है।

2. प्यास बुझाने के लिए अपनाएं प्राकृतिक तरीके

फ्रिज का अत्यधिक ठंडा पानी शरीर की नसों को सिकोड़ सकता है। प्यास बुझाने के लिए इन पारंपरिक तरीकों पर लौटें:

घड़े का अमृत: मिट्टी के घड़े का पानी प्राकृतिक रूप से शीतल होता है और शरीर के pH लेवल को बनाए रखता है। कोल्ड ड्रिंक्स और डिब्बाबंद जूस से पूरी तरह बचें।

देसी सुपर-ड्रिंक्स: डिहाइड्रेशन और लू (Heat Stroke) से बचने के लिए सत्तू, छाछ, नींबू-पुदीने की शिकंजी और आम का पना सर्वोत्तम है।

विशेष टिप: आम का पना बनाते समय आम को उबालने के बजाय भूनकर इस्तेमाल करें। भुना हुआ पना शरीर की गर्मी को खींचने में अधिक प्रभावी होता है।

3. ‘शरीर की पुकार’ को न करें नजरअंदाज

अक्सर गर्मियों में हमें अचानक कुछ ठंडा या खट्टा पीने की तीव्र इच्छा होती है। डॉ. खरे बताते हैं कि यह केवल ‘जीभ का स्वाद’ नहीं बल्कि ‘शरीर की जरूरत’ है। जब शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स या पानी की कमी होती है, तभी ऐसी इच्छाएं पैदा होती हैं। ऐसे समय में तुरंत पना या सत्तू का सेवन करें।

4. स्वस्थ रहने के 5 अचूक ‘मूल मंत्र’

हाइड्रेटेड रहें: प्यास न लगने पर भी नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें।

धूप से सुरक्षा: दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें। जरूरी हो तो सिर और कान को सूती कपड़े से ढककर ही निकलें।

स्वच्छता का ध्यान: पसीने के कारण संक्रमण का खतरा रहता है, इसलिए दिन में दो बार स्नान और सूती कपड़ों का प्रयोग करें।

ताजगी को चुनें: हमेशा ताजा बना हुआ भोजन ही करें, बासी भोजन इस मौसम में जल्दी विषाक्त (Toxic) हो सकता है।

पूर्ण विश्राम: शरीर को रिकवर करने और ऊर्जा बचाने के लिए 7-8 घंटे की गहरी नींद लें।

“स्वयं को सुरक्षित रखें, आयुर्वेद अपनाएं।”

— डॉ. सौरभ खरे, कुलपहाड़ (मोबाइल: 8738842447)

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