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जखनियां/गाजीपुर : मदर्स डे पर नम हुई आंखें : “मां चाहे जहां रहें, खुश रहें…”

मदर्स डे पर नम हुई आंखें : “मां चाहे जहां रहें, खुश रहें…”

डॉ. सुनीता सिंह की श्रद्धांजलि सभा एवं ब्रह्मभोज में उमड़ा जनसैलाब, बेटे आयुष के शब्द सुन भावुक हुए लोग

जखनियां/गाजीपुर।गाजीपुर जनपद के तहसील जखनियां अंतर्गत ग्राम सभा अलीपुर मदंरा में रविवार को दिवंगत शिक्षिका डॉ. सुनीता सिंह की श्रद्धांजलि सभा एवं ब्रह्मभोज का आयोजन अत्यंत भावुक वातावरण में संपन्न हुआ। चारधाम यात्रा से लौटते समय सड़क दुर्घटना में असामयिक निधन के बाद आयोजित इस कार्यक्रम में गाजीपुर सहित आसपास के कई जनपदों से बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे। पूरे दिन उनके आवास पर राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक एवं अधिवक्ता जगत से जुड़े लोगों का तांता लगा रहा।श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने डॉ. सुनीता सिंह के सरल, सौम्य एवं मृदुल व्यक्तित्व को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। एक प्रधानाध्यापिका के रूप में उन्होंने शिक्षा जगत में अपनी अलग पहचान बनाई थी। उनके व्यवहार, सादगी, अनुशासन और संस्कारों की चर्चा करते हुए लोगों की आंखें नम हो उठीं।बताते चलें कि उनके पति अखिलानंद सिंह जखनियां तहसील में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस दुखद घड़ी में क्षेत्र के हर वर्ग के लोग परिवार के साथ खड़े नजर आए।सभा के दौरान दिवंगत शिक्षिका के पुत्र आयुष सिंह ने जब अपनी मां के चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए भावुक शब्द कहे तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। उन्होंने रुंधे गले से कहा—

> “आज मेरी मां की मेरे घर से अंतिम विदाई है। आज उनका श्रद्धांजलि सभा और ब्रह्मभोज है। संयोग देखिए कि आज ही मदर्स डे भी है। मेरी मां चाहे जहां रहें, खुश रहें… मेरी तरफ से मां को यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

इतना कहते ही आयुष सिंह की आंखों से आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। वहां मौजूद लोगों ने उन्हें ढांढस बंधाया और पूरा माहौल गमगीन हो गया।श्रद्धांजलि सभा में परिवार के सदस्यों ने भी दिवंगत आत्मा को याद करते हुए अपने भाव व्यक्त किए। अधिवक्ता अखिलानंद सिंह के छोटे भाई सर्वानंद सिंह झुन्ना ने कहा कि डॉ. सुनीता सिंह केवल परिवार ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा थीं। उनका व्यवहार इतना आत्मीय था कि जो भी उनसे मिलता, हमेशा के लिए उनका अपना बन जाता था।वहीं अटल कुमार सिंह ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि डॉ. सुनीता सिंह ने शिक्षा और संस्कार को अपने जीवन का मूल उद्देश्य बनाया था। वे हमेशा समाज और परिवार को जोड़कर चलने की बात करती थीं। उनका असमय जाना समाज और शिक्षा जगत की अपूरणीय क्षति है।परिवार के सबसे छोटे सदस्य अनुराग सिंह ने भी अपनी भाभी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उन्हें परिवार की शक्ति बताया।सभा में उपस्थित डॉक्टर मनोज कुमार सिंह ने कहा कि डॉ. सुनीता सिंह का जीवन सादगी, सेवा और संस्कारों का प्रतीक था। उन्होंने अपने व्यवहार और कार्यशैली से समाज में सम्मान अर्जित किया। उनका व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।इस अवसर पर गाजीपुर जनपद सहित आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे राजनीतिक एवं गैर राजनीतिक संगठनों के पदाधिकारी, शिक्षा जगत से जुड़े लोग, अधिवक्ता गण, शिक्षक, समाजसेवी तथा क्षेत्रीय नागरिकों ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए ईश्वर से उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की।

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