जखनियां (गाजीपुर) : जखनियां में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर गूंजा ‘योगः चित्तवृत्ति निरोधः’ का संदेश, आत्मसाक्षात्कार की राह पर चलने का आह्वान

जखनियां में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर गूंजा ‘योगः चित्तवृत्ति निरोधः’ का संदेश, आत्मसाक्षात्कार की राह पर चलने का आह्वान

जखनियां (गाजीपुर)। 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जखनियां क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में योग के आध्यात्मिक, बौद्धिक एवं शारीरिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि “योगः चित्तवृत्ति निरोधः” अर्थात् योग मन की चंचल वृत्तियों पर नियंत्रण का साधन है। योग केवल व्यायाम या शारीरिक गतिविधि नहीं, बल्कि आत्मसाक्षात्कार और जीवन-दर्शन का मार्ग है।कार्यक्रम में बताया गया कि महर्षि पतंजलि ने योगसूत्र में योग के आठ अंग—यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि—का उल्लेख किया है। इन चरणों के माध्यम से व्यक्ति अपने मन को संयमित कर, शरीर को स्वस्थ रखते हुए आत्मा के साक्षात्कार और परमात्मा से मिलन की दिशा में अग्रसर होता है वक्ताओं ने कहा कि आज पूरा विश्व योग दिवस मना रहा है और यह भारत के लिए गर्व का विषय है कि उसने विश्व को योग और अध्यात्म की अनुपम धरोहर प्रदान की है। विश्व ने योग की महत्ता को समझते हुए इसे अपनाया है। योग एक ऐसी साधना है, जो मनुष्य को मानसिक, बौद्धिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ एवं संतुलित बनाती है। योग का वास्तविक अर्थ शरीर, मन और आत्मा का समन्वय स्थापित करना है।कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि योग हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा मानवता को दिया गया एक अमूल्य उपहार है। यह एक प्राचीन चिकित्सीय पद्धति होने के साथ-साथ अध्यात्म से जुड़ने का माध्यम भी है। योग में भक्ति, कर्म और ध्यान जैसे अनेक आयाम समाहित हैं, जो मनुष्य को सकारात्मक ऊर्जा और आनंद प्रदान करते हैं। योग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके लिए किसी विशेष साधन या संसाधन की आवश्यकता नहीं होती। गरीब और अमीर, बच्चे और बुजुर्ग, हर वर्ग और हर आयु का व्यक्ति योग कर इसके लाभ प्राप्त कर सकता है।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. विनय पाण्डेय, भुड़कुड़ा महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के शिक्षक डॉ. संतोष कुमार मिश्र, भाजपा नेता अशोक चौहान, आशीष त्रिपाठी, धर्मेंद्र पाण्डेय, गम्भीर यादव, विवेक मिश्र, अभिषेक मिश्र, लालजी शर्मा, विनय मिश्र सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।कार्यक्रम का संचालन प्रशिक्षक के रूप में डॉ. आनन्द ने किया। समापन अवसर पर प्रधानाचार्य प्रमोद कुमार मिश्र ने उपस्थित लोगों से योग के वास्तविक उद्देश्य को समझते हुए आत्मसाक्षात्कार की यात्रा प्रारंभ करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “योग करें, स्वस्थ रहें और सदैव प्रसन्न रहें।”
‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।



