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गोरखपुर सांसद रवि किशन के नाम बड़ी उपलब्धि, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में बने ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’, अब छात्रों को देंगे अभिनय और कला का व्यावहारिक प्रशिक्षण

गोरखपुर सांसद रवि किशन के नाम बड़ी उपलब्धि, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में बने ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’, अब छात्रों को देंगे अभिनय और कला का व्यावहारिक प्रशिक्षण

गोरखपुर। गोरखपुर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद और प्रसिद्ध अभिनेता रवि किशन शुक्ला के नाम एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज हो गई है। फिल्म जगत में अपने लंबे और सफल करियर के बाद राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे रवि किशन को अब शिक्षा के क्षेत्र में भी नई जिम्मेदारी मिली है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने उन्हें विश्वविद्यालय के *’प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’* के रूप में नियुक्त करने का निर्णय लिया है। इस नियुक्ति के माध्यम से वह विद्यार्थियों को अपने दशकों के अभिनय और फिल्म उद्योग के अनुभव से परिचित कराएंगे तथा उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे।

यह निर्णय विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में आयोजित कार्य परिषद की महत्वपूर्ण बैठक में लिया गया। बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विकास, नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन तथा कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा हुई। इन्हीं निर्णयों में सबसे अधिक चर्चा का विषय सांसद रवि किशन की ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के रूप में नियुक्ति रही।

एक वर्ष का होगा कार्यकाल

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार रवि किशन का कार्यकाल प्रारंभिक रूप से *एक वर्ष* का रहेगा। इस दौरान वे समय-समय पर विश्वविद्यालय पहुंचकर विद्यार्थियों के साथ संवाद करेंगे, विशेष व्याख्यान देंगे, कार्यशालाओं का आयोजन करेंगे तथा अभिनय, रंगमंच, सिनेमा, संचार कौशल और व्यक्तित्व विकास जैसे विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर उनके कार्यकाल का विस्तार भी किया जा सकता है।

बिना वेतन और मानदेय निभाएंगे जिम्मेदारी

विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह नियुक्ति पूरी तरह मानद (Honorary) आधार पर की गई है। रवि किशन को विश्वविद्यालय की ओर से किसी प्रकार का वेतन, मानदेय या यात्रा भत्ता नहीं दिया जाएगा। उनका योगदान केवल विद्यार्थियों के शैक्षणिक और व्यावहारिक विकास के उद्देश्य से होगा। विश्वविद्यालय का मानना है कि उद्योग और समाज के अनुभवी लोगों के अनुभव का लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचाना आज की शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

क्या होता है ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’?

‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ की अवधारणा उच्च शिक्षा संस्थानों में व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की गई है। इसके तहत ऐसे प्रतिष्ठित और अनुभवी व्यक्तियों को विश्वविद्यालय से जोड़ा जाता है, जिन्होंने किसी क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हों। इन विशेषज्ञों का मुख्य कार्य विद्यार्थियों को वास्तविक अनुभवों से परिचित कराना, उद्योग की जरूरतों को समझाना और उन्हें रोजगारोन्मुख शिक्षा प्रदान करना होता है।

कला, संगीत और नाटक के विद्यार्थियों को मिलेगा विशेष लाभ

रवि किशन विशेष रूप से ललित कला, संगीत, रंगमंच और नाट्य कला से जुड़े विद्यार्थियों के साथ कार्य करेंगे। वे अभिनय की बारीकियां, कैमरे के सामने प्रस्तुति, संवाद अदायगी, मंच संचालन, भाव-भंगिमा, व्यक्तित्व विकास, ऑडिशन की तैयारी और फिल्म उद्योग की कार्यप्रणाली जैसे विषयों पर छात्रों को प्रशिक्षित करेंगे। इससे छात्रों को केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं, बल्कि वास्तविक पेशेवर अनुभव भी प्राप्त होगा।

विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनेंगे रवि किशन

रवि किशन का जीवन संघर्ष, मेहनत और सफलता की मिसाल माना जाता है। भोजपुरी सिनेमा से शुरुआत कर उन्होंने हिंदी, दक्षिण भारतीय और अन्य भाषाओं की फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश कर गोरखपुर से सांसद के रूप में जनता का प्रतिनिधित्व किया। ऐसे में उनके अनुभव छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत साबित हो सकते हैं।

रवि किशन ने जताया आभार

नियुक्ति पर खुशी व्यक्त करते हुए सांसद रवि किशन ने विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा,

“मुझे जो दायित्व सौंपा गया है, उसका पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करूंगा। ललित कला, संगीत और नाटक के विद्यार्थियों के अभिनय कौशल को निखारने तथा उन्हें फिल्म और रंगमंच की व्यावहारिक जानकारी देने का हर संभव प्रयास करूंगा। मेरा उद्देश्य युवाओं को उनके सपनों तक पहुंचाने में सहयोग करना है।”

विश्वविद्यालय को नई दिशा मिलने की उम्मीद

शिक्षाविदों का मानना है कि इस तरह की नियुक्तियां विश्वविद्यालय और उद्योग के बीच की दूरी को कम करती हैं। जब किसी क्षेत्र के सफल और अनुभवी व्यक्ति सीधे विद्यार्थियों के साथ जुड़ते हैं तो उन्हें वास्तविक चुनौतियों, अवसरों और कार्यशैली की बेहतर समझ मिलती है। इससे छात्रों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और रोजगार क्षमता में भी वृद्धि होती है।

गोरखपुर विश्वविद्यालय का यह कदम उच्च शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन को उम्मीद है कि रवि किशन के अनुभव और मार्गदर्शन से कला एवं प्रदर्शन कलाओं से जुड़े विद्यार्थियों को नई ऊर्जा, नई सोच और बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

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