गोरखपुर में बड़ा हादसा: राप्ती नदी के गोरक्षनाथ घाट पर गुंबदनुमा छज्जा गिरा, एक अधिवक्ता की मौत, दूसरा गंभीर; जिला अस्पताल में वकीलों का 2 घंटे हंगामा

गोरखपुर में बड़ा हादसा: राप्ती नदी के गोरक्षनाथ घाट पर गुंबदनुमा छज्जा गिरा, एक अधिवक्ता की मौत, दूसरा गंभीर; जिला अस्पताल में वकीलों का 2 घंटे हंगामा

गोरखपुर। रविवार सुबह करीब 11:30 बजे गोरखपुर में राप्ती नदी किनारे बने गोरक्षनाथ घाट पर एक बड़ा हादसा हो गया। यहां बने चबूतरे पर लगा गुंबदनुमा छज्जा अचानक भरभराकर गिर गया। छज्जे के नीचे बैठे दो अधिवक्ता मलबे में दब गए। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत मलबा हटाकर दोनों को बाहर निकाल
ई-रिक्शा से ले जाना पड़ा अस्पताल, एंबुलेंस आधे घंटे तक नहीं पहुंची
परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसे के तुरंत बाद एंबुलेंस को फोन किया गया, लेकिन करीब आधे घंटे तक एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। इसके बाद दोनों घायलों को चादर में रखकर ई-रिक्शा से जिला अस्पताल ले जाया गया।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने अधिवक्ता आलोक अस्थाना (45) की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज ले जाते समय रास्ते में ही आलोक की मौत हो गई।
जिला अस्पताल पर हंगामा, एंबुलेंस में तोड़फोड़
आलोक अस्थाना की मौत के बाद शव को एंबुलेंस से वापस जिला अस्पताल लाया गया तो बड़ी संख्या में अधिवक्ता वहां पहुंच गए। आक्रोशित वकीलों ने करीब 2 घंटे तक हंगामा किया और एंबुलेंस में तोड़फोड़ कर दी। मौके पर एसपी सिटी, सीओ और कई थानों की पुलिस तैनात है।*कौन थे आलोक अस्थाना?
मृतक अधिवक्ता की पहचान 45 वर्षीय आलोक अस्थाना के रूप में हुई है। वह राप्तीनगर के रहने वाले थे और मूल रूप से कुशीनगर के सन्हू गांव के निवासी थे। वह पिछले करीब 20 साल से दीवानी कचहरी में प्रैक्टिस कर रहे थे। परिवार में पत्नी शालिनी, बेटा आदित्य, बेटी सिद्धि और छोटा भाई हैं। बेटा पंजाब के एनआईटी से बीटेक कर रहा है।
बताया गया कि रविवार सुबह करीब 10 बजे आलोक अपने साथी अधिवक्ता विनोद तिवारी की मां के निधन पर उनके घर गए थे। इसके बाद वह अंतिम संस्कार में शामिल होने गोरक्षनाथ घाट पहुंचे थे। वहां वह शक्तिनगर निवासी अधिवक्ता संजय सिंह के साथ चबूतरे पर बैठे थे, तभी यह हादसा हुआ। संजय सिंह की हालत गंभीर बताई जा रही है।
पत्नी ने डॉक्टरों पर लगाया लापरवाही का आरोप
अधिवक्ता आलोक की पत्नी शालिनी अस्थाना ने कोतवाली थाने में तहरीर दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने गंभीर हालत के बावजूद इलाज नहीं किया और सीधे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, जिससे उनके पति की मौत हो गई। पत्नी का यह भी आरोप है कि सीएमओ से संपर्क करने पर कथित तौर पर कहा गया कि “यहां रोज 10 लोग मरते हैं, एक और मर जाएगा तो क्या हो जाएगा।”
कहां हुआ हादसा?
यह हादसा जिला मुख्यालय से करीब 4 किलोमीटर दूर राप्ती नदी किनारे बने गोरक्षनाथ घाट पर हुआ। यहां अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों के बैठने के लिए 8 से अधिक चबूतरे बनाए गए हैं और उन पर गुंबदनुमा छज्जे लगे हैं। इनमें से एक छज्जा रविवार को अचानक गिर गया।



