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गुरुग्राम : नृत्याभिनय नृत्य एवं कला स्कूल का प्रथम वार्षिकोत्सव भव्यता एवं सांस्कृतिक गरिमा के साथ सम्पन्न

रिपोर्टर इंडिया नाउ 24 सुरेंद्र गुरुग्राम 

नृत्याभिनय नृत्य एवं कला स्कूल का प्रथम वार्षिकोत्सव भव्यता एवं सांस्कृतिक गरिमा के साथ सम्पन्न

ओडिसी नृत्य की प्रतिष्ठित संस्था नृत्याभिनय नृत्य एवं कला स्कूल’* का प्रथम वार्षिकोत्सव रविवार को सायंकाल आर्य समाज ऑडिटोरियम, डीएलएफ फेज-2, गुरुग्राम में अत्यंत भव्य एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया।

प्रसिद्ध ओडिसी प्रशिक्षिका तथा नृत्यांगना गुरु माँ कविता मोहंती, जिन्हें ‘राष्ट्रीय नृत्य शिरोमणि’, ‘नृत्य भूषण’ एवं ‘ब्रज कादंबरी’ जैसी अनेक उपाधियों से सम्मानित किया गया है, ने वर्ष 2005 में इस स्कूल की स्थापना की थी। आज संस्था ने ओडिसी नृत्य शिक्षण के 20 गौरवपूर्ण वर्ष पूर्ण किए हैं।
यह जानकारी संस्था के वरिष्ठ सदस्य श्री विजय अग्रवाल ने दी।

कार्यक्रम का शुभारम्भ निर्मल रथ की मधुर गणेश वंदना तथा विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। प्रसिद्ध भजन गायक श्री मिहिर रे ने अपने भजनों से वातावरण को भक्तिमय कर दिया।

इस अवसर पर संस्था के 35 विद्यार्थियों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का सफल आयोजन गुरु माँ कविता मोहंती के मार्गदर्शन एवं निर्देशक श्री हिरण्य मोहंती के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। साथ ही प्रख्यात गुरु श्री गंगाधर दास की उपस्थिति एवं आशीर्वाद ने पूरे आयोजन को विशेष आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।

दर्शकों में उपस्थित डॉ. विष्णुप्रिया एवं डॉ. अशोक चौधरी के सुंदर नृत्य ने भी खूब तालियाँ बटोरीं।

समारोह में अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे, जिनमें श्री सरोज मोहंती, डॉ. कृष्णप्रिया साहू, प्रो. डॉ. बसंत साहू एवं श्रीमती शुभाश्री महापात्र, आई.ए.एस. प्रमुख थीं। इनकी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ी।

कार्यक्रम स्थल की व्यवस्था में अभिभावक श्री अरूप सामंता का विशेष सहयोग रहा।

कार्यक्रम का शुभारम्भ गुरु वंदना से हुआ। इसके पश्चात विष्णु स्तुति, महाकाली प्रस्तुति, ‘त्राहि दुर्गा’ तथा ‘अच्युतम् केशवम्’ जैसी भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने पूरे सभागार को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया। कलाकारों की अभिव्यक्ति, सौंदर्यपूर्ण मुद्राओं और ओडिसी नृत्य की गरिमा ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मंच संचालन सुश्री कनिका मक्कड़ एवं सुश्री नूपुर अग्रवाल ने प्रभावशाली ढंग से किया। विद्यार्थी मास्टर अंशुमान ने तबला वादन तथा आई.आई.टी. के छात्र श्री शुभकांत साहू ने बांसुरी वादन से समारोह की सांगीतिक गरिमा को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं।

कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण विद्यार्थियों के अभिभावकों द्वारा प्रस्तुत संबलपुरी लोकनृत्य रहा। सीमित समय में इस नृत्य को सीखकर अभिभावकों ने जिस उत्साह, समर्पण और आत्मविश्वास के साथ मंच पर प्रस्तुति दी, उसने दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त की और यह सिद्ध कर दिया कि कला के प्रति लगन हर आयु में संभव है।

इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसे संस्था के गुरुओं, वर्तमान विद्यार्थियों, पूर्व विद्यार्थियों एवं अभिभावकों ने मिलकर एक परिवार की भावना से सफल बनाया। यह समारोह केवल एक वार्षिकोत्सव नहीं, बल्कि नृत्याभिनय परिवार की एकता, गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय संस्कृति और सामूहिक सहयोग का अनुपम उत्सव बन गया।

समारोह के समापन पर सभी प्रतिभागियों को उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुति एवं सहभागिता के लिए स्मृति-चिह्न एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर अनेक कला-प्रेमी डॉ. कृष्णा साहू, श्री रवि महापात्र, सुश्री रितु पांड्या, श्री सिद्धार्थ गुप्ता, सुश्री नेहा अग्रवाल आदि भी उपस्थित रहे।

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