गाजीपुर : सावन के प्रथम सोमवार पर सिद्धपीठ कनुवाने धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, शिवभक्ति में सराबोर रहे श्रद्धालु

सावन के प्रथम सोमवार पर सिद्धपीठ कनुवाने धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, शिवभक्ति में सराबोर रहे श्रद्धालु
पीठाधीश्वर पूज्य सत्यानंद गिरी महाराज बोले— भगवान शिव की आराधना आत्मशुद्धि, संयम और लोककल्याण का मार्ग
गाजीपुर। पवित्र श्रावण मास के प्रथम सोमवार के अवसर पर जनपद के प्रसिद्ध सिद्धपीठ कनुवाने धाम में श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। प्रातःकाल से ही भगवान भोलेनाथ के दर्शन एवं जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा मठ परिसर भक्तिमय वातावरण में गूंजता रहा। श्रद्धालुओं में महिलाओं की संख्या विशेष रूप से अधिक रही।पीठाधीश्वर पूज्य सत्यानंद गिरी जी महाराज के मार्गदर्शन में मठ परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। भक्तों की सुविधा, स्वच्छता एवं सुव्यवस्थित दर्शन की समुचित व्यवस्था की गई, जिससे दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण वातावरण में भगवान शिव का पूजन-अर्चन किया।इस अवसर पर अपने आध्यात्मिक उद्बोधन में पूज्य सत्यानंद गिरी जी महाराज ने कहा कि श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। यह महीना केवल पूजा-अर्चना का नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, सेवा, तप और सदाचार का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव अत्यंत भोले और करुणामय हैं। सच्चे मन, श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई उनकी आराधना से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है।महाराज ने कहा कि श्रावण मास में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, शिव पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का नियमित जप तथा दान-पुण्य का विशेष महत्व है। भगवान शिव अपने भक्तों के भाव के भूखे हैं। इसलिए आडंबर से अधिक आवश्यक है कि मन निर्मल हो, आचरण श्रेष्ठ हो और जीवन में सत्य, सेवा तथा करुणा का पालन किया जाए।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि श्रावण मास को केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित न रखें, बल्कि समाज में प्रेम, भाईचारा, पर्यावरण संरक्षण, गौसेवा तथा जरूरतमंदों की सहायता जैसे पुण्य कार्यों में भी सहभागिता करें। यही भगवान शिव की सच्ची आराधना है।दिनभर कनुवाने धाम में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भक्तों ने विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक, पूजन एवं आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और विश्व कल्याण की कामना की। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा।



