गाजीपुर : लम्पी से बचाव को गाजीपुर में वृहद टीकाकरण अभियान शुरू

लम्पी से बचाव को गाजीपुर में वृहद टीकाकरण अभियान शुरू
25 टीमों को लगाया गया, 2.66 लाख गोवंशों का होगा निःशुल्क टीकाकरण
गाजीपुर, 10 सितम्बर। जनपद में मवेशियों को लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) से सुरक्षित रखने के लिए पशुपालन विभाग की ओर से वृहद टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया गया है। गुरुवार को मुख्य विकास अधिकारी आलोक प्रसाद की अध्यक्षता में लम्पी स्किन डिजीज की रोकथाम एवं प्रभावी नियंत्रण को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान सीडीओ ने बीमारी के लक्षण, बचाव और रोकथाम के लिए पशुपालकों द्वारा बरती जाने वाली सावधानियों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि जनपद में अभी लम्पी स्किन डिजीज का प्रकोप नहीं है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीमारी के प्रकोप को देखते हुए एहतियात के तौर पर जिले में टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। पशुपालन विभाग द्वारा 9 सितम्बर 2026 से पूरे जनपद में वृहद टीकाकरण अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके लिए कुल 25 टीमें लगाई गई हैं, जो गांव-गांव जाकर पशुपालकों के गोवंशों का निःशुल्क टीकाकरण कर रही हैं। अभियान के तहत जनपद के कुल 2,66,143 गोवंशों का टीकाकरण किया जाएगा।लम्पी स्किन डिजीज एक विषाणुजनित बीमारी है। इसमें पशु को तेज बुखार, आंख और नाक से पानी गिरना, पैरों में सूजन तथा पूरे शरीर पर कठोर एवं चपटी गांठें पड़ने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। सिर, गर्दन, थूथन, थन, गुदा तथा अंडकोष या योनिमुख के आसपास भी गांठें उभर सकती हैं। गंभीर स्थिति में शरीर पर बड़ी संख्या में गांठें हो जाती हैं और घाव बनने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।बीमारी से प्रभावित पशुओं में सांस लेने में कठिनाई, वजन कम होना और अत्यधिक कमजोरी जैसी समस्या हो सकती है। गंभीर स्थिति में पशु की मृत्यु भी हो सकती है। गाभिन पशुओं में गर्भपात तथा दुधारू गायों में दुग्ध उत्पादन में काफी कमी आने की आशंका रहती है।सीडीओ ने पशुपालकों से अपील की कि किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर उसे तत्काल स्वस्थ पशुओं से अलग कर दें और नजदीकी पशु चिकित्सालय अथवा पशु सेवा केंद्र को सूचना दें। प्रभावित पशुओं का आवागमन प्रतिबंधित रखें तथा उन्हें साफ पानी उपलब्ध कराएं। पशुओं को मच्छर, मक्खी और किलनी आदि से बचाने के लिए पशु चिकित्सक की सलाह से कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करें।पशुबाड़े और खलिहान में फिनायल अथवा सोडियम हाइपोक्लोराइट आदि का छिड़काव कर नियमित रूप से कीटाणुशोधन करने की सलाह दी गई है। बीमार पशुओं की देखभाल करने वाले व्यक्ति को स्वस्थ पशुओं के बाड़े से दूर रहने तथा पहले स्वस्थ पशुओं को चारा-पानी देने और उसके बाद बीमार पशुओं की देखभाल करने को कहा गया है। बीमार पशुओं की देखभाल के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना भी जरूरी है।बीमारी के प्रकोप के दौरान पशुपालकों को अपने पशुओं को सामूहिक चराई के लिए नहीं भेजना चाहिए। पशुओं को पशु मेले अथवा प्रदर्शनी में ले जाने से बचना चाहिए। बीमार और स्वस्थ पशुओं को एक साथ चारा-पानी नहीं कराना चाहिए तथा प्रभावित क्षेत्रों से पशु खरीदकर नहीं लाने की सलाह दी गई है।यदि किसी पशु की मृत्यु हो जाती है तो उसके शव को खुले में नहीं फेंकना चाहिए, बल्कि वैज्ञानिक विधि से दफनाना चाहिए। रोगी पशु का दूध बछड़े को न पिलाने की भी सलाह दी गई है। पशुपालकों को बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर किसी प्रकार की लापरवाही न बरतते हुए तत्काल विभाग को सूचना देने को कहा गया है।पशुपालक अपने गोवंश में लम्पी स्किन डिजीज के लक्षण पाए जाने पर तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सालय अथवा पशु सेवा केंद्र से संपर्क करें। पशुपालकों के द्वार पर पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए टोल फ्री नंबर 1962 पर भी संपर्क किया जा सकता है।



