कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे: हाईटेक 3D तकनीक भी फेल! बारिश में धंसी सड़क ने उठाए निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे: हाईटेक 3D तकनीक भी फेल! बारिश में धंसी सड़क ने उठाए निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल
लखनऊ / कानपुर: हाल ही में बने 63 किलोमीटर लंबे कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के धंसने और सड़क की ऊपरी परत उखड़ने के कारण इसके निर्माण और गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। देश के सबसे हाईटेक प्रोजेक्ट्स में शामिल इस एक्सप्रेसवे में पहली बार अत्याधुनिक 3D ऑटोमेटेड मशीन गाइडेंस (AMG) तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था, लेकिन पहली बारिश में ही सड़क क्षतिग्रस्त हो गई।
क्या है 3D AMG तकनीक?
3D AMG एक ऐसी आधुनिक प्रणाली है जिसमें निर्माण मशीनों के कंप्यूटर सिस्टम को 3D इंजीनियरिंग मॉडल से जोड़ा जाता है।
सटीकता: मशीन पर लगे रिसीवर real-time डाटा देते हैं, जिससे मिट्टी की कटाई, भराव, सड़क की ऊंचाई और ढलान का सटीक नियंत्रण होता है।
सुविधा: इसने पारंपरिक बार-बार किए जाने वाले सर्वे और मैनुअल मार्किंग की जरूरत को खत्म कर दिया।
तकनीक सही, तो चूक कहाँ हुई? (विशेषज्ञों की राय)
NHAI से जुड़े विशेषज्ञों और इंजीनियरों के अनुसार, केवल उन्नत तकनीक सड़क की मजबूती की गारंटी नहीं दे सकती। * सामग्री की गुणवत्ता: 3D AMG मशीन सड़क के आकार और ढलान का नियंत्रण तो करती है, लेकिन इस्तेमाल की जा रही मिट्टी, गिट्टी या अन्य सामग्री की गुणवत्ता तय नहीं कर सकती।
भौतिक कारक: सड़क की मजबूती मिट्टी की प्रकृति, नमी का स्तर, परतों की मोटाई, उचित कम्पेक्शन (दबाव) और बेहतर जल निकासी (Drainage System) पर निर्भर करती है।
डिजिटल सिस्टम पर अत्यधिक निर्भरता: आशंका जताई जा रही है कि साइट पर तैनात इंजीनियरों ने डिजिटल मॉनिटरिंग के आउटपुट को ही अंतिम मान लिया और ऑन-साइट (ऑन-द-ग्राउंड) जांच में ढिलाई बरती।
निष्कर्ष और आगे का रास्ता
सड़क का धंसना यह साबित करता है कि आधुनिक तकनीक कभी भी मानवीय निगरानी, ऑन-साइट गुणवत्ता जांच और फील्ड टेस्ट का विकल्प नहीं बन सकती। अब यह गहन जांच का विषय है कि क्या डिजिटल मॉडल के अनुसार काम करते समय निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, कम्पेक्शन और ड्रेनेज सिस्टम में लापरवाही बरती गई थी।



