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राष्ट्रीय लोक अदालत में कुटुम्ब न्यायालय ने रचा कीर्तिमान71 पारिवारिक वादों का हुआ निस्तारण, 11 दंपतियों ने माला पहनाकर फिर थामा एक-दूसरे का हाथ

राष्ट्रीय लोक अदालत में कुटुम्ब न्यायालय ने रचा कीर्तिमान71 पारिवारिक वादों का हुआ निस्तारण, 11 दंपतियों ने माला पहनाकर फिर थामा एक-दूसरे का हाथ

गाजीपुर, 12 सितंबर। राष्ट्रीय लोक अदालत में कुटुम्ब न्यायालय गाजीपुर ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए कुल 71 पारिवारिक वादों का सफल निस्तारण किया। प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय गाजीपुर के पीठासीन अधिकारी श्री शैलोज चंद्रा की अध्यक्षता में आयोजित लोक अदालत में पारिवारिक विवादों के समाधान के साथ ही कई परिवारों में पुनः खुशियां लौट आईं।लोक अदालत में निस्तारित मामलों में सबसे अधिक संख्या भरण-पोषण से संबंधित वादों की रही। कुल 35 वाद निष्पादन के थे, जिनमें पीड़ित महिलाओं को उनके बकाया भरण-पोषण की सम्पूर्ण धनराशि का भुगतान मौके पर ही कराया गया। न्यायालय की इस पहल से संबंधित महिलाओं को आर्थिक राहत मिली और उन्हें अपने अधिकारों का लाभ प्राप्त हुआ।

 

11 दंपतियों ने माला पहनाकर जताई साथ रहने की सहमति

लोक अदालत की सबसे सुखद तस्वीर उस समय देखने को मिली, जब लंबे समय से विवाद के कारण अलग रह रहे 11 दंपतियों ने आपसी मतभेद समाप्त कर पुनः साथ-साथ रहने का निर्णय लिया। सभी दंपति न्यायालय में स्वयं उपस्थित हुए। उन्होंने एक-दूसरे को माला पहनाकर खुशी का इजहार किया और आपस में मिष्ठान वितरित किया। इस दौरान न्यायालय परिसर में काफी देर तक खुशी और भावुकता का माहौल बना रहा।मीडिएशन में अधिक सफलता मिलने पर बढ़ सकता है निस्तारण का आंकड़ाप्रधान न्यायाधीश श्री शैलोज चंद्रा ने बताया कि पिछले दो माह में सुलह-समझौते के लिए मीडिएशन सेंटर में लगभग 200 से अधिक मामले प्रेषित किए गए थे। इनमें से 05 मामले ही मीडिएशन के माध्यम से सफल होकर समझौते तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि यदि मीडिएशन के माध्यम से सफल मामलों की संख्या अधिक होती, तो राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारण का आंकड़ा और भी बढ़ सकता था।उन्होंने आम जनमानस से अपील की कि पारिवारिक विवादों को आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से निपटाने का प्रयास करें। लोक अदालत विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का एक सशक्त माध्यम है, जिसके जरिए समय और धन की बचत के साथ परिवारों में आपसी सौहार्द भी कायम किया जा सकता है

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