लखनऊ: 2021 में निकाले गए एंबुलेंस चालकों का स्वास्थ्य मंत्री आवास पर हंगामा, पुलिस ने हिरासत में लेकर भेजा इको गार्डन

लखनऊ: 2021 में निकाले गए एंबुलेंस चालकों का स्वास्थ्य मंत्री आवास पर हंगामा, पुलिस ने हिरासत में लेकर भेजा इको गार्डन

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में मंगलवार को 2021 में नौकरी से निकाले गए 108 और 102 एंबुलेंस सेवा के कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। सभी प्रदर्शनकारी स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक के आवास का घेराव करने पहुंचे थे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे एंबुलेंस ड्राइवरों को हिरासत में ले लिया और बाद में उन्हें इको गार्डन भेज दिया गया।
2021 में गई नौकरी, 5 साल से भटक रहे हैं
प्रदर्शनकारी एंबुलेंस चालकों ने बताया कि उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर दिन-रात सेवाएं दीं। इस दौरान कई कर्मचारियों ने अपनी जान भी गंवाई, लेकिन उसके बाद ही उन्हें सेवा से हटा दिया गया। 2021 में नौकरी जाने के बाद से वे पिछले 5 साल से बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं और न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
GVKEMRI कंपनी पर गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारियों ने उत्तर प्रदेश में एंबुलेंस सेवा का संचालन करने वाली निजी कंपनी GVKEMRI पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 20 हजार एंबुलेंस कर्मचारी GVKEMRI कंपनी के तहत काम करते हैं। कंपनी कर्मचारियों का शारीरिक और मानसिक शोषण कर रही है। गाड़ियों के मेंटेनेंस का पैसा भी कर्मचारियों के वेतन से काटा जा रहा है। विरोध करने वालों को बर्खास्त कर दिया जाता है और कई एंबुलेंस कर्मियों पर फर्जी केस भी दर्ज कराए गए हैं।
भर्ती के नाम पर 25 से 50 हजार की वसूली
कर्मचारी नेता शरद यादव ने आरोप लगाया कि एंबुलेंस कंपनी भर्ती के नाम पर वसूली करती है। ड्राइवर से 25 हजार और टेक्नीशियन से 50 हजार रुपये लिए जाते हैं। कंपनी ने विरोध करने वाले करीब 9 हजार लोगों को अब तक नौकरी से निकाल दिया है, जिसमें 2021 में विरोध करने वाले 3 हजार कर्मचारी शामिल हैं। हालत यह हो गई है कि कई कर्मचारी आज डिलीवरी बॉय के रूप में काम करके परिवार का पेट पाल रहे हैं।
रोते हुए बोला कर्मचारी – गले में लटका मेडल कोरोना संघर्ष का प्रतीक है
प्रदर्शन करने आए अजय नाम के कर्मचारी ने अपना हाल बताते हुए फफक-फफक कर रो पड़ा। उसने बताया कि 2021 में उसे नौकरी से निकाल दिया गया। तब से न्याय के लिए स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक के आवास के 100 चक्कर लगा चुका है, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
अजय ने कहा, “कोरोनाकाल में हम लोगों ने सेवा दी और इस दौरान लगभग हमारे 100 साथियों की मौत हो गई। हमारे लोगों के साथ अन्याय हो रहा है, भ्रष्टाचार हो रहा है। शिकायत कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। हम कहां जाएं? हमारे गले में जो मेडल टंगा है, यह कोरोनाकाल में मिलने वाला सम्मान और संघर्ष का प्रतीक है।”


