सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल: 1977 से गोरखनाथ मंदिर की व्यवस्था संभाल रहे यासीन अंसारी

सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल: 1977 से गोरखनाथ मंदिर की व्यवस्था संभाल रहे यासीन अंसारी
गोरखनाथ मंदिर में आपसी विश्वास और सामाजिक समरसता की एक अनूठी मिसाल देखने को मिलती है। मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखने वाले यासीन अंसारी पिछले लगभग 50 वर्षों (वर्ष 1977) से मंदिर से जुड़े हुए हैं और विभिन्न व्यवस्थाओं का सुचारू रूप से संचालन कर रहे हैं।
सफर की शुरुआत: यासीन अंसारी ने 1977 में मंदिर में सेवा देनी शुरू की थी, उस वक्त मंदिर की व्यवस्थाएं सीमित थीं। शुरुआती दौर में उन्होंने मंदिर के चढ़ावे के रखरखाव का काम पूरी ईमानदारी के साथ संभाला।
विस्तार और वर्तमान भूमिका: जैसे-जैसे मंदिर का दायरा और श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई, उनकी जिम्मेदारियां भी बढ़ती गईं। वर्तमान में वे मंदिर परिसर के निर्माण, विस्तार और अन्य व्यवस्थाओं के पर्यवेक्षण (Supervision) की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विश्वास:
सीएम योगी आदित्यनाथ जब भी गोरखपुर आते हैं, तो मंदिर के विकास और निर्माण कार्यों पर यासीन अंसारी से चर्चा करते हैं।
नौकरी नहीं, विश्वास का दायित्व: यासीन अंसारी का कहना है कि वे इसे सिर्फ एक ‘नौकरी’ नहीं मानते, बल्कि यह उनके लिए गहरी आस्था और विश्वास से जुड़ा हुआ एक दायित्व है।



